एक नोट छापने में कितना होता है खर्च, जानें भारत में कहां होती है नोटों की छपाई
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हमारे जीवन में पैसे का बहुत महत्व है। लगभग में कोई भी काम करने के लिए पैसा बहुत आवश्यक है। अगर आप अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते हैं, अपनी मनपसंद कार खरीदना चाहते हैं, एक आलीशान घर बनाना चाहते हैं, छुट्टियों में घुमने जाना चाहते हैं, तो आपको पैसे की जरूरत पड़ती है।
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हर किसी को पैसा चाहिए पर क्या आपके दिमाग में कभी यह प्रश्न आया है कि आपकी लगभग हर समस्या का समाधान करने वाले ये नोट आते कहां से हैं? मतलब इनकी छपाई कहा होती है? नोट बनाने में कितना खर्च होता है? नोट और सिक्के बनाने का अधिकार किसको है? नोट बनाएं कहां जाते हैं? अगर आप भी यह जानना चाहते हैं, तो हम लाए हैं आपके सवालों के जवाब
कौन छापता है नोट और कौन तय करता है कितने नोट छापने हैं?
भारत में नोट छापने का एकाधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है। भारतीय रिजर्व बैंक पूरे देश में एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोट छापता है। एक रुपये के नोट छापने और सभी प्रकार के सिक्के बनाने का अधिकार वित्त मंत्रालय के पास है। जबकि ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरे देश में मुद्रा की पूर्ति (नोट और सिक्के दोनों) करने का अधिकार केवल भारतीय रिजर्व बैंक के पास ही है।
भारत में कितनी मुद्रा छापी जाएगी ये न्यूनतम आरक्षी प्रणाली द्वारा निर्धारित किया जाता है। साल 1957 से यह प्रणाली पूरे देश में इसी तरह से काम कर रही है। इस प्रणाली के अनुसार आरबीआई को 200 करोड़ की संपत्ति अपने पास रखनी होती है, जिसमे 115 करोड़ रुपये के सोने का भण्डार और 85 रुपये करोड़ की विदेशी मुद्रा रखनी अनिवार्य है। इतनी संपत्ति अपने पास रखने के बाद आरबीआई अर्थव्यवस्था की जरुरत के हिसाब से कितनी भी मात्रा में नोट छाप सकता है। इसे ही न्यूनतम आरक्षी प्रणाली कहा जाता है।
कहां छपते हैं नोट?
- नोट प्रेस देवास (मध्यप्रदेश) : देवास की नोट प्रेस में एक साल में 265 करोड़ नोट छपते हैं। यहां पर 20, 50, 100, 500 रुपए मूल्य के नोट छपते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि देवास में ही नोटों में प्रयोग होने वाली स्याही का उत्पादन भी किया जाता है।
- करेंसी प्रेस नोट नासिक (महाराष्ट्र) : पहले यहां 1,2,5,10 के नोट छापे जाते थे, पर साल 1991 के बाद यहां 50 और 100 के नोट भी छापे जाने लगे।
- इसके अलावा पश्चिम बंगाल के सालबोनी और कर्नाटक के मैसूर में भी नोट प्रेस हैं। मैसूर में पहले 1000 रुपये के नोट छपते थे।
- 1 रुपये का नोट छापने में 1.14 रुपये खर्च होते हैं, यह एकमात्र ऐसा नोट है जिसकी बाजार कीमत वास्तविक लागत से ज्यादा है।
- 5 रुपये का नोट छापने में 48 पैसे का खर्च आता है।
- 10 रुपये का नोट छापने में 96 पैसे का खर्च आता है।
- 20 रुपये का नोट छापने में 96 पैसे का खर्च आता है।
- 50 रुपये का नोट छापने में 1.81 रुपये का खर्च आता है।
- 100 रुपये का नोट छापने में 1.20 रुपये का खर्च आता है।
- 200 रुपये का नोट छापने में 2.15 रुपये का खर्च आता है।
- 500 रुपये का नोट छापने में 2.13 रुपये का खर्च आता है।
- 2000 रुपये का नोट छापने में 3.53 रुपये का खर्च आता है।
नोट के बाद अब सिक्कों की बात हो जाए।
- मुंबई
- कोलकाता
- हैदराबाद
- नोएडा
- 1 रुपये के सिक्के को छपने में लगभग 70 पैसे का खर्च आता है।
- 10 रुपये के सिक्के को छापने में 6.10 रुपये का खर्च आता है।
ये जानना भी जरूरी
कम कीमत वाले नोटों (जैसे 1,5,10 और 20 रुपये के नोट) को छापने का खर्च कम आता है। इसका सबसे बड़ा कारण होता है सिक्योरिटी फीचर्स । कम कीमत वाले नोटों में कम सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं और इस कीमत के नोटों को नकली भी कम मात्रा में ही बनाया जाता है। ज्यादा सिक्योरिटी फीचर्स के चलते बड़े नोटों में छपाई का खर्च ज्यादा आता है।
बड़े नोटों की छपाई पर खर्च कई बार बदल भी जाता है क्योंकि नोट में लगने वाले कच्चे माल (स्याही और कागज) को आयात करना पड़ता है, जिससे दरों में परिवर्तन के कारण कीमत घटती-बढ़ती रहती हैं। मसलन राज्यसभा में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए डाटा के अनुसार साल 2017-18 में 2000 रुपये के नोट प्रिंट करनेे में 4.18 रुपये लगते थे, जिसकी कीमत घटकर साल 2018-19 में 3.53 रुपये हो गई।
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