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Kerala: कलामंडलम में छात्रों को पहली बार परोसा गया मांसाहारी भोजन, 20 जुलाई को होगी मेस समिति की बैठक

Fri, 12 Jul 2024 07:10 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 12 Jul 2024 07:10 PM IST
सार

Kalamandalam: केरल के कलामंडलम के इतिहास में पहली बार छात्रों की मांग पर कैंटीन में मांसाहारी भोजन परोसा गया। एक अधिकारी ने बताया कि वियूर सेंट्रल जेल के कैदियों द्वारा संचालित प्रसिद्ध रसोई में तैयार की गई चिकन बिरयानी बुधवार को छात्रों को परोसी गई।

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Kerala Kalamandalam serves non-vegetarian food to students for the first time in its history
Non Veg Food - फोटो : Freepik

विस्तार

Kerala Kalamandalam: केरल के कलामंडलम के इतिहास में पहली बार 10 जुलाई को छात्रों की मांग पर कैंटीन में मांसाहारी व्यंजन परोसे गए। कलामंडलम राज्य की पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक प्रमुख सार्वजनिक संस्थान है। डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया कि वियूर सेंट्रल जेल के कैदियों द्वारा संचालित प्रसिद्ध रसोई में तैयार की गई चिकन बिरयानी बुधवार को छात्रों को परोसी गई।

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अधिकारी के अनुसार, 1930 में अपनी स्थापना के बाद से यह पहली बार था कि संस्थान में छात्रों को केवल पौधे-आधारित या डेयरी-आधारित भोजन नहीं परोसा गया।

कलामंडलम एक आवासीय संस्थान है जो कथकली, मोहिनीअट्टम, थुल्लल, कुटियाट्टम (पुरुष और महिला), पंचवाद्यम, कर्नाटक संगीत, मृदंगम आदि जैसे विभिन्न प्रदर्शन कलाओं का प्रशिक्षण प्रदान करता है।
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अधिकारी ने कहा कि मांस आधारित व्यंजन परोसने का निर्णय विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा छात्रों की मांग के बाद लिया गया था। छात्रों की मांग थी कि उन्हें पौधे आधारित भोजन तक सीमित न रखा जाए।
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शुरू में, छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के प्रतिनिधियों वाली एक मेस समिति बनाई गई थी, और छात्रों की मांग के आधार पर 10 जुलाई को चिकन बिरयानी परोसने का निर्णय लिया गया था। अधिकारी ने कहा कि मेस समिति की बैठक 20 जुलाई को होने वाली है, और छात्रों को अन्य मांस आधारित व्यंजन परोसने पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

अधिकारी ने बताया, "भोजन निःशुल्क परोसा जाता है, और मांसाहारी व्यंजन महीने में एक या दो बार परोसे जा सकते हैं।" 

केरल कलामंडलम की स्थापना 1930 में प्रसिद्ध कवि पद्मभूषण वल्लथोल नारायण मेनन और उनके करीबी सहयोगी मनक्कुलम मुकुंदराज ने कक्कड़ करनवप्पाद के संरक्षण में की थी। शुरू में, यह विशेष रूप से कथकली के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र था।

त्रिशूर जिले के चेरुथुरूथी गांव में भरतपुझा नदी के तट पर स्थित, केरल कलामंडलम को 14 मार्च, 2006 को केंद्र सरकार द्वारा कला और संस्कृति के लिए एक डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी घोषित किया गया था।


एक डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी के रूप में, केरल कलामंडलम वर्तमान में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी अनुसंधान कार्यक्रमों के साथ-साथ माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम, सभी एक ही छत के नीचे प्रदान करता है।

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