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Report: आईटी और मीडिया सेक्टर में काम करने वालों को झेलना पड़ता है सबसे अधिक तनाव; हालिया सर्वेक्षण में खुलासा

Fri, 28 Feb 2025 03:35 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Fri, 28 Feb 2025 03:35 PM IST
सार

Work Stress: एक हालिया सर्वेक्षण में बताया गया है कि आईटी और मीडिया सेक्टर में नौकरी का तनाव सबसे अधिक है। बैंकिंग, बीमा और गिग इकॉनमी में भी कर्मचारी तनावग्रस्त हैं।
 

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Job Stress High Among Youth in IT & Media Sectors in Kerala; Says Survey Report
आईटी और मीडिया सेक्टर में काम करने वाले झेलते हैं सबसे अधिक तनाव: सर्वेक्षण - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

Work Stress: आईटी क्षेत्र (84.3 प्रतिशत) और मीडिया (83.5 प्रतिशत) में काम करने वाले युवा कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अधिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी केरल में हुए एक सर्वेक्षण में सामने आई है। इसके अनुसार, केरल में आईटी और मीडिया क्षेत्र के कर्मचारी कार्यस्थल पर अधिक तनाव का सामना करते हैं। यह जानकारी राज्य युवा आयोग द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में सामने आई है।

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केरल युवा आयोग के अध्यक्ष एम. शजार ने यह सर्वेक्षण रिपोर्ट गुरुवार को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को प्रस्तुत की। इस अवसर पर राज्य के मत्स्य पालन, संस्कृति और युवा मामलों के मंत्री साजी चेरियन भी उपस्थित थे।

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बैंकिंग, बीमा और गिग कर्मचारियों को भी तनाव की शिकायत

सर्वेक्षण के अनुसार, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 80.6 प्रतिशत कर्मचारियों और गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत 75.5 प्रतिशत कर्मचारियों ने भी कार्यस्थल पर तनाव की शिकायत की है।

पांच क्षेत्रों के लिए हुआ सर्वेक्षण

रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा और औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को तुलनात्मक रूप से कम तनाव का सामना करना पड़ता है। यह अध्ययन 18-40 वर्ष की आयु वर्ग के कर्मचारियों के बीच किया गया था। इस सर्वेक्षण में पांच क्षेत्रों - आईटी, गिग अर्थव्यवस्था, मीडिया, खुदरा/औद्योगिक और बैंकिंग/बीमा से कुल 1,548 कर्मचारियों ने भाग लिया।

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इस आयुवर्ग के लोगों में तनाव का स्तर सबसे अधिक

अध्ययन में यह भी पाया गया कि 30-39 वर्ष की आयु वर्ग के उत्तरदाताओं में कार्यस्थल पर तनाव का स्तर सबसे अधिक था। साथ ही, महिलाओं (74.7 प्रतिशत) में कार्यस्थल का तनाव पुरुषों (73.7 प्रतिशत) की तुलना में थोड़ा अधिक पाया गया।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि 68.25 प्रतिशत महिलाओं और पुरुषों ने माना कि काम के दबाव के कारण उनका कार्य-जीवन संतुलन (वर्क-लाइफ बैलेंस) प्रभावित हो रहा है।

समस्या के समाधान के लिए सुझाव

  • कार्यस्थलों में मनोरंजन और आराम के लिए विशेष स्थान (रिक्रिएशनल कॉर्नर) बनाए जाएं, जिससे कर्मचारियों को तनाव से राहत मिले।
  • बड़ी कंपनियों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक विशेषज्ञ अधिकारी (संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक) नियुक्त किया जाए, जो कर्मचारियों की मानसिक सेहत का ध्यान रखे।
  • छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स के लिए सरकार एक ऐसा मॉडल अपनाए, जिससे वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं और कार्यक्रम चला सकें।
  • सरकार को मानसिक स्वास्थ्य बीमा अनिवार्य करना चाहिए, जिसमें थेरेपी, काउंसलिंग और मनोरोग उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हों।


इन निष्कर्षों पर चर्चा करने के लिए 3 और 4 मार्च को कझाकूट्टम में ‘आधुनिक कार्य दुनिया और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।

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