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JNU Hostel: जेएनयू में विवाहित शोधार्थियों के लिए रहना हुआ महंगा, सुबनसिर हॉस्टल के नियम और शुल्क बदले
Sun, 24 May 2026 09:30 AM IST
Shahin Praveen
ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shahin Praveen
Updated Sun, 24 May 2026 09:30 AM IST
सार
JNU Subansir Hostel: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवाहित शोधार्थियों के लिए रहना अब महंगा हो गया है। प्रशासन ने सुबनसिर हॉस्टल में विवाहित शोधार्थियों के लिए नियमों और शुल्क में बदलाव करते हुए आवास व्यवस्था से जुड़े नए प्रावधान लागू किए हैं, जिससे शोधार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
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जेएनयू, JNU
- फोटो : JNU: @www.jnu.ac.in/main/
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विस्तार
JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने विवाहित शोधार्थियों के लिए बने महानदी एक्सटेंशन (सुबनसिर हॉस्टल) से संबंधित आवंटन नियमों और हॉस्टल शुल्क में बदलाव किए हैं। यह फैसला गठित समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। विश्वविद्यालय के डीन छात्र कार्यालय ने अधिसूचना जारी कर दी है।
इसके अनुसार विश्वविद्यालय हॉस्टल मैनुअल से एमफिल कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रावधान हटा दिए हैं। इसकी वजह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2022 के पीएचडी नियमों के तहत एमफिल कार्यक्रम समाप्त कर दिया है। हॉस्टल मैनुअल से जीरो सेमेस्टर से संबंधित संदर्भ भी हटाए गए हैं। यह प्रावधान 2018 के बाद लागू नई पीएचडी अध्यादेश में शामिल न होने की वजह से किया है।
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इसके अनुसार विश्वविद्यालय हॉस्टल मैनुअल से एमफिल कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रावधान हटा दिए हैं। इसकी वजह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने वर्ष 2022 के पीएचडी नियमों के तहत एमफिल कार्यक्रम समाप्त कर दिया है। हॉस्टल मैनुअल से जीरो सेमेस्टर से संबंधित संदर्भ भी हटाए गए हैं। यह प्रावधान 2018 के बाद लागू नई पीएचडी अध्यादेश में शामिल न होने की वजह से किया है।
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चार साल तक रह सकेंगे हॉस्टल में
नए नियमों के अनुसार भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणी के छात्रों को पीएचडी में प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही हॉस्टल में रहने की अनुमति होगी। शोध जमा करने के लिए कोई बकाया नहीं और आवेदन करते समय भी हॉस्टल खाली करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि के बाद किसी भी परिस्थिति में हॉस्टल प्रवास की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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