केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का सुझाव : खोला जाए देश का पहला विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने देश में एक राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने देश में एक राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने शनिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को इस संबंध में सुझाव भी दिया। केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को अपने स्वायत्त संस्थानों की अनुसंधान क्षमता का लाभ उठाकर अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रयास करने चाहिए।
प्रौद्योगिकी भवन में वैज्ञानिकों और विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि शोध प्रकाशनों के मामले में आज देश वैश्विक रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश दुनिया की प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त विज्ञान पत्रिकाओं में शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता में विश्व स्तर पर नौवें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भले ही शोध पत्रों की गुणवत्ता में भारत की वैश्विक रैंकिंग 14 से बढ़कर नौ हो गई है, देश को अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक शीर्ष पांच में लाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
मंत्री ने कहा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे अपने विभिन्न स्वायत्त अनुसंधान और विकास संस्थानों की अनुसंधान शक्तियों का लाभ उठाकर अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
Discussed with the scientific fraternity at Technology Bhavan, launch of 7,500 STI based Start-Ups to coincide with 75th year of India's Independence and leveraging of different Autonomous R&D bodies to set up a National S&T Research University. pic.twitter.com/ooPCvwJqec
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) July 10, 2021
डॉ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान देने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत दखल के कारण 2016 में, पेटेंट कानून को में सुधार संभव हो पाए। पेटेंट कानून को कम नियामक और अधिक प्रोत्साहन उन्मुख बनाया गया, जिससे न केवल काम करने में आसानी हुई बल्कि पेटेंट में सुधार के लिए लगने वाले समय में भी कमी आई।
इतना ही नहीं, पिछले सात वर्षों में दायर रेजीडेंट पेटेंट की संख्या, पूर्णकालिक समकक्ष (एफटीई) शोधकर्ताओं की संख्या और महिला वैज्ञानिकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। मंत्री ने मानव संसाधन से संबंधित योजनाओं जैसे मानक, इंस्पायर, डॉक्टरेट और पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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