JEE Advanced: परीक्षा में पास होने के बाद भी 72 हजार उम्मीदवारों ने नहीं किया पंजीकरण, ये था कारण
पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश लेना हर इंजीनियर का सपना होता था पर 2019 के आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं लगता। अब हर इंजीनियरिंग करने वाला छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में एडमिशन नहीं लेना चाहता। जेईई एडवांस के चेयरपर्सन एमएल शर्मा द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, हर साल की तरह, इस साल भी, कई छात्रों ने जेईई एडवांस यानी आईआईटी में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा को क्वालिफाई किया। पर तकरीबन 72 हजार स्टूडेंट्स ने परीक्षा पास करने के बाद भी पंजीकरण नहीं करवाया।
2019 में, 11.47 लाख जेईई मुख्य परीक्षा के उम्मीदवारों में से, 2.45 लाख छात्रों ने जेईई एडवांस परीक्षा को पार किया लेकिन केवल 1.73 लाख उम्मीदवार ने ही इसके लिए पंजीकरण करवाया है। ऐसा ही हाल पिछले साल भी देखने को मिला। 2018 में, 2.31 लाख छात्रों में से, 1.65 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण किया। पिछले दो साल के आंकड़ों के आधार पर, छात्रों की संख्या में और गिरावट आने की संभावना है क्योंकि हर परीक्षार्थी जो पंजीकृत नहीं है, परीक्षा के लिए उपस्थित हुआ है।
आपको बता दें कि जेईई एडवांस परीक्षा का दूसरा चरण है क्योंकि जेईई मेन्स के स्कोर जोकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, के आधार पर कट-ऑफ को पूरा करने वाले कुछ चुनिंदा उम्मीदवार ही इसके लिए पात्र हैं।
सूत्रों के अनुसार पता चला कि IIITM ग्वालियर के प्रमुख, भारतीय इंजीनियर और शिक्षाविद् संजय गोविंद ढांडे ने इस टॉपिक पर बताया है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है..? उन्होंने कहा कि IITs आज भी छात्रों और उनके माता-पिता की पहली पसंद है। पर अब छात्र आईआईटी की तुलना में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) का चयन करेंगे। इन दिनों इंजीनियरिंग के इच्छुक उम्मीदवार खाली समय के दौरान अन्य चीजों जैसे इंटर्नशिप आदि करने के लिए भी उत्सुक रहते हैं।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि छात्रों और अभिभावकों पर जेईई मेन में उपस्थित होने का दबाव होता है क्योंकि यह भविष्य के लिए अनेकों विकल्प सामने खोल सकता है। लेकिन अब वे केवल बीटेक की डिग्री को पाने के पीछे नहीं जाना चाहते हैं और हो सकता है वे नए युग के रचनात्मक करियर को पसंद कर सकते हैं।
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