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IIT Delhi: मिश्रित रूप से परीक्षा लिए जाने पर छात्रों में रोष, भेदभाव करने वाला नियम बताया
Sat, 13 Nov 2021 07:15 PM IST
सुभाष कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सुभाष कुमार
Updated Sat, 13 Nov 2021 07:15 PM IST
सार
IIT Delhi: छात्रों का कहना है कि जो भी छात्र परिसर में आते हैं, उन्हें अपने विभाग को सूचना देने और कक्षा में ही परीक्षा देने को कहा जा रहा है। वहीं जो छात्र अब तक वापस नहीं आए हैं, उन्हें ऑनलाइन माध्यम से घर से ही परीक्षा देने की सुविधा दी जा रही है। जो कि समान अवसर को नहीं दिखाता है।
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IIT Delhi
- फोटो : Social media
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विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के छात्रों ने संस्थान द्वारा आयोजित किए जा रहे परीक्षा के नियमों पर रोष जाहिर किया है और इसे समान अवसर न प्रदान करने वाला बताया है। दरअसल, संस्थान इस बार मिश्रित रूप में परीक्षा का आयोजन कर रहा है। इसके अनुसार छात्रों को संस्थान और घर दोनों जगहों से परीक्षा देने की सुविधा दी गई है। इस सुविधा को भेदभावपूर्ण बताते हुए कई छात्रों ने कहा है कि मिश्रित रूप में परीक्षा लेने का यह नियम छात्रों को समान अवसर नहीं प्रदान करता है।
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छात्रों का कहना है कि जो भी छात्र परिसर में आते हैं, उन्हें अपने विभाग को सूचना देने और कक्षा में ही परीक्षा देने को कहा जा रहा है। वहीं जो छात्र अब तक वापस नहीं आए हैं, उन्हें ऑनलाइन माध्यम से घर से ही परीक्षा देने की सुविधा दी जा रही है। जो कि समान अवसर को नहीं दिखाता है। इस मामले में छात्रों ने ऑनलाइन याचिका अभियान भी शुरू किया है। अब तक 650 से छात्रों ने इस पर अपनमे हस्ताक्षर किए हैं।
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ऑनलाइन याचिका में छात्रों का कहना है कि सभी छात्र वापस नहीं आए हैं, इसका मतलब है कि कई छात्र अपनी सुविधा के हिसाब से घर से परीक्षा देंगे। ऐसी स्थिति जहां 50 फीसदी छात्र घर से परीक्षा देंगे और बाकी छात्रों को संस्थान में परीक्षा देने के लिए कहना भेदभावपूर्ण फैसला है। परीक्षा के लिए अच्छा माहौल होना बहुत महत्वपूर्ण है। छात्रों ने कहा कि उन्हें बहुत कम समय में संस्थान नें परीक्षा की जानकारी दी गई। इस वक्त तक कई छात्र घर जाने के लिए महंगे टिकट करवा चुके थे। संस्थान को इस बारे में पहले से ही घोषणा करनी चाहिए थी।
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संस्थान ने आरोपों को नकारा
हालांकि, संस्थान के अधिकारियों ने छात्रों के इस आरोप को सिरे से नकार दिया है और कहा है कि यह केवल एक परीक्षा है जिसमें छात्र घर बैठे या फिर संस्थान में आकर भी परीक्षा दे सकते हैं। इसमें किसी भी तरह के भेदभाव की कोई भी गुंजाईश नहीं है। संस्थान के अकादमिक डीन शांतनु राय ने इस मामले पर कहा कि परीक्षा में भेदभाव या पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं है। जब तक छात्र संस्थान के परिसर में हैं, उन्हें परीक्षा देने और कक्षा में आने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। परीक्षा छात्रों के लिए ही है और कक्षा के माहौल में बुराई क्या है।
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