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Homi Bhabha Birth Anniversary: पिता चाहते थे इंजीनियर बनकर टाटा इंडस्ट्रीज में शामिल हो,पढ़िए भाभा की कहानी
Sun, 30 Oct 2022 11:05 AM IST
सौरभ पांडे
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सौरभ पांडे
Updated Sun, 30 Oct 2022 11:05 AM IST
सार
Homi Bhabha 113th Birth Anniversary: आज देश महान भौतिक विज्ञानी डॉ. होमी जहांगीर भाभा की 113वीं जयंती मना रहा है।
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Homi Jehangir Bhabha
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विस्तार
Homi Bhabha 113th Birth Anniversary: डॉ. होमी जहांगीर भाभा भारत के प्रमुख दूरदर्शी परमाणु भौतिक वैज्ञानिकों में से एक थे। आज देश उनकी 113वीं जयंती मना रहा है। उनका जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई के पारसी परिवार जहांगीर और मेहरबाई भाभा के घर में हुआ था। होमी जे. भाभा ने परमाणु विज्ञान के क्षेत्र में एक शक्तिशाली भारत की कल्पना की थी। उन्हें प्यार से भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का सपना देखा था। उनके प्रयोगों और अथक प्रयासों की बदौलत भारत समकालीन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण परमाणु शक्तियों में से एक के रूप में उभरा है। होमी जे. भाभा भारत में छुट्टी मनाने के लिए आए थे, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू हो जाने उन्हें जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर भारत में ही रुकना पड़ा। उस समय वे ब्रिटेन में परमाणु भौतिकी के छात्र थे। भाभा ने परमाणु कार्यक्रम के निदेशक के रूप में कार्य किया और भारत के परमाणु कार्यक्रम को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के संस्थापक निदेशक थे।
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना
होमी ने अपनी स्कूली शिक्षा कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल, बॉम्बे में की थी। साल 1930 में होमी भाभा ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री और 1934 में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। साल 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान होमी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, (IISc) बैंग्लोर में बतौर रीडर जॉइन किया था, उस समय नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन हेड थे। साल 1944 में होमी भाभा ने भौतिकी पर शोध के लिए सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सामने एक संस्थान बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद भारतीय परमाणु अनुसंधान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की गई।
होमी ने अपनी स्कूली शिक्षा कैथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल, बॉम्बे में की थी। साल 1930 में होमी भाभा ने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री और 1934 में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। साल 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान होमी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, (IISc) बैंग्लोर में बतौर रीडर जॉइन किया था, उस समय नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन हेड थे। साल 1944 में होमी भाभा ने भौतिकी पर शोध के लिए सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सामने एक संस्थान बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद भारतीय परमाणु अनुसंधान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की गई।
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क्वांटम थ्योरी को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका
भाभा स्वयं एक चित्रकार होने के कारण कला और संस्कृति से बहुत प्रभावित थे। उनकी शास्त्रीय संगीत और ओपेरा में बहुत रुचि थी। भाभा ने प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी नील्स बोहर के साथ काम किया था और क्वांटम थ्योरी को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भाभा को उस समय के महत्वपूर्ण रहस्य के विषय मेसन कण की पहचान करने का श्रेय दिया जाता है।
भाभा स्वयं एक चित्रकार होने के कारण कला और संस्कृति से बहुत प्रभावित थे। उनकी शास्त्रीय संगीत और ओपेरा में बहुत रुचि थी। भाभा ने प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी नील्स बोहर के साथ काम किया था और क्वांटम थ्योरी को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भाभा को उस समय के महत्वपूर्ण रहस्य के विषय मेसन कण की पहचान करने का श्रेय दिया जाता है।
पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में चयन
भाभा को 1955 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। भाभा ने हथियारों और परमाणु हथियारों के उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग को हतोत्साहित किया था। उन्होंने गरीबी को खत्म करने के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग की वकालत की।
भाभा को 1955 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर पहले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। भाभा ने हथियारों और परमाणु हथियारों के उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग को हतोत्साहित किया था। उन्होंने गरीबी को खत्म करने के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग की वकालत की।
भौतिक विज्ञानी वाल्टर हिटलर के साथ किया शोध
भाभा ने कैस्केड थ्योरी विकसित करने के लिए जर्मनी स्थित भौतिक विज्ञानी वाल्टर हिटलर के साथ शोध किया था, जिससे उन्हें ब्रह्मांडीय विकिरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। भाभा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी।
भाभा ने कैस्केड थ्योरी विकसित करने के लिए जर्मनी स्थित भौतिक विज्ञानी वाल्टर हिटलर के साथ शोध किया था, जिससे उन्हें ब्रह्मांडीय विकिरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। भाभा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी।
इन पुरस्कारों से थे सम्मानित
भाभा को परमाणु कार्यक्रम में उनकी खोजों के लिए एडम्स पुरस्कार , रॉयल सोसाइटी के फेलो और 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। भाभा ने भारत के परमाणु कार्यक्रम में उनके योगदान और समर्पण के लिए 'भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक' की उपाधि अर्जित की थी।
भाभा को परमाणु कार्यक्रम में उनकी खोजों के लिए एडम्स पुरस्कार , रॉयल सोसाइटी के फेलो और 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। भाभा ने भारत के परमाणु कार्यक्रम में उनके योगदान और समर्पण के लिए 'भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक' की उपाधि अर्जित की थी।
हवाई जहाज दुर्घटना में हुआ था निधन
24 जनवरी 1966 को एक हवाई जहाज दुर्घटना में मशहूर परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा का निधन हुआ था। उनकी मृत्यु के बाद, उनके सम्मान में मुंबई में परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान का नाम बदलकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र कर दिया गया।
24 जनवरी 1966 को एक हवाई जहाज दुर्घटना में मशहूर परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा का निधन हुआ था। उनकी मृत्यु के बाद, उनके सम्मान में मुंबई में परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान का नाम बदलकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र कर दिया गया।
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