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GBU: पहली बार होगा भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतरराष्ट्रीय महामंथन, जीबीयू में 24 से 26 तक सम्मेलन

Mon, 20 Jul 2026 01:55 PM IST
Akash Kumar अंकुर त्रिपाठी
अंकुर त्रिपाठी Published by: Akash Kumar Updated Mon, 20 Jul 2026 01:55 PM IST
सार

GBU: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में 24-26 जुलाई तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होगा। इसमें अमेरिका-यूरोप सहित कई देशों के विद्वान जुटेंगे। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को नई शिक्षा नीति के तहत आधुनिक विमर्श से जोड़ना है।
 

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GBU to Host International Conference on Indian Knowledge Systems; Experts from US, Europe to Attend
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

GBU: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में पहली बार भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) के पुनरुत्थान पर केंद्रित वार्षिक अकादमिक सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन 24 से 26 जुलाई तक चलेगा। इसमें अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों के विद्वान, शोधकर्ता और शिक्षाविद भाग लेंगे। आयोजन का उद्देश्य भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक शिक्षा, नीति निर्माण और वैश्विक अकादमिक विमर्श में प्रमुख स्थान दिलाना है।

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मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. माधव गोविंद ने बताया कि सम्मेलन भारतीय संस्कृति, दर्शन, विज्ञान और कला की समृद्ध परंपराओं को नए संदर्भों में प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। इससे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का लक्ष्य विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानो को एक मंच पर लाकर सहयोग बढ़ाना, नए शोध को प्रोत्साहित करना और भारतीय ज्ञान परंपराओं को विश्वविद्यालयों, कॉलेजों तथा मुख्यधारा के शैक्षणिक विमर्श से जोड़ना है।

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पहला सम्मेलन जेएनयू में हुआ, अब जीबीयू को मौका

कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने बताया कि दुनिया के कई देशों ने अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को विकास का आधार बनाया है। ऐसे समय में जीबीयू को इस सम्मेलन की मेजबानी मिलना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर पहला वार्षिक सम्मेलन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित हुआ था और अब इसकी मेजबानी जीबीयू कर रहा है। इससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।

कुलसचिव प्रो. चंदर कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन 'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। जीबीयू में हर वर्ष 20 से अधिक देशों के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं और विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या भारतीय शिक्षा प्रणाली पर बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।


तीन दिवसीय सम्मेलन में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा विषय विशेषज्ञों के संवाद सत्र, पैनल चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। देश-विदेश के शोधकर्ताओं को अपने शोध और विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
 

विकसित भारत-2047 की दिशा में अहम पहल

मानना है कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सोच को मजबूती देगा और ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शिक्षा, शोध तथा वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने में भूमिका निभाएगा। विदेशी छात्रों की बढ़ती भागीदारी भी इसकी वैश्विक उपयोगिता को रेखांकित करती है।

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