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ONOS: एक राष्ट्र एक सदस्यता के तहत 11.3 करोड़ से अधिक शोध लेख डाउनलोड, छात्रों को मिली फ्री जर्नल्स की पहुंच

Tue, 17 Mar 2026 10:40 AM IST
Shahin Praveen अमर उजाला, ब्यूरो
अमर उजाला, ब्यूरो Published by: Shahin Praveen Updated Tue, 17 Mar 2026 10:40 AM IST
सार

One Nation One Subscription: ‘एक राष्ट्र एक सदस्यता’ योजना के तहत देशभर के उच्च शिक्षण और शोध संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स तक मुफ्त पहुंच मिल रही है। इस पहल के जरिए अब तक 11.3 करोड़ से अधिक शोध लेख डाउनलोड किए जा चुके हैं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को बड़ा लाभ मिल रहा है।

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Free Access to Global Journals Boosts Research Under One Nation One Subscription
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

ONOS: भारत सरकार की एक राष्ट्र एक सदस्यता (ONOS) योजना के पहले वर्ष में छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों ने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 11.3 करोड़ से अधिक शोध लेख डाउनलोड किए। यह अकादमिक संसाधनों तक पहुंच में बड़ी कामयाबी है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने 40.3 लाख डाउनलोड के साथ सबसे आगे रहा।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2024 में इस योजना को मंजूरी दी और इसे 1 जनवरी 2025 से लागू किया गया। इस योजना को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का शुरू किया गया इनफ्लिबनेट केंद्र संचालित कर रहा है। योजना के लिए तीन वर्ष (2025-2027) के लिए 6,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य देशभर के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्रीय शोध संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक मुफ्त पहुंच देना है। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार सीधे प्रकाशकों को भुगतान करती है, जिससे संस्थानों को सदस्यता शुल्क नहीं देना पड़ता।

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शोध संसाधनों का बड़ा विस्तार

ओएनओएस से पहले अलग-अलग मंत्रालयों के 10 जर्नल कंसोर्टियम काम करते थे, जिनसे करीब 8,000 जर्नल उपलब्ध थे। ओएनओएस के लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 13,000 से अधिक जर्नल हो गई। लाभार्थियों की संख्या भी 55 लाख से बढ़कर लगभग एक करोड़ हो गई और भाग लेने वाले संस्थान 2,300 से बढ़कर लगभग 5,800 तक पहुंच गए। इस ओएनओएस योजना का उद्देश्य 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के 13,000 से अधिक लेखों तक पहुंच प्रदान करना। देश में लगभग एक करोड़ छात्र, शोधकर्ता और संकाय सदस्य इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

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शोध लेख डाउनलोड करने वाले शीर्ष संस्थान: आईआईटी मद्रास के बाद भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू 28.3 लाख डाउनलोड के साथ दूसरे स्थान पर रहा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (15.3 लाख) और दिल्ली विश्वविद्यालय (14.2 लाख) प्रमुख उपयोगकर्ताओं में रहे। राज्य विश्वविद्यालयों में अन्ना विश्वविद्यालय 7.8 लाख डाउनलोड के साथ शीर्ष पर रहा। वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (7.3 लाख) के अलावा, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने भी बड़ी संख्या में डाउनलोड दर्ज किए।

प्रकाशकों और डाउनलोड का आंकड़ा: इस मंच पर हर महीने लगभग एक करोड़ लेख डाउनलोड हो रहे हैं। अभी इसमें एल्सेवियर, स्प्रिंगर नेचर, विली, टेलर एंड फ्रांसिस, आईईईई, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे 30 यह मंच onos.gov.in पोर्टल के जरिए संचालित होता है। इसे सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र संचालित करता है। शोधकर्ता संस्थागत लॉग-इन या आईपी आधारित पहुंच से जर्नल यानी लेख पढ़ सकते हैं।

डिजिटल पोर्टल और अतिरिक्त सुविधाएं

यह पहल शोधकर्ताओं के लिए लेख प्रकाशन शुल्क (एपीसी) की मदद भी देती है। इससे उन्हें 430 से अधिक गोल्ड ओपन-एक्सेस जर्नल्स (प्रकाशित शोध लेखों को बिना किसी शुल्क के पाठकों के लिए तुरंत और मुफ्त में ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं।) में प्रकाशन की सुविधा मिलती है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि यह योजना टियर-2 और टियर-3 शहरों के शोधकर्ताओं को भी वैश्विक शोध सामग्री तक पहुंच देकर देश में वैज्ञानिक और बहु-विषयक अनुसंधान को मजबूत कर रही है।

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