Education Reform: इस राज्य में बदल गया स्कूल टाइम, छात्रों को करनी होगी ज्यादा पढ़ाई; इन बच्चों पर पड़ेगा असर
Kerala School Hours Increase: केरल में नए शैक्षणिक कैलेंडर के तहत स्कूलों में पढ़ाई के घंटे बढ़ाए गए हैं। अब 8वीं से 10वीं तक के छात्र 204 कार्य दिवसों में अतिरिक्त 30 मिनट पढ़ाई करेंगे। शिक्षा मंत्री शिवनकुट्टी ने फैसले को सही ठहराया।
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Kerala Academic Calendar 2025: केरल सरकार के नए शैक्षणिक कैलेंडर 2025-26 को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने रविवार को साफ किया कि स्कूल की पढ़ाई के घंटे बढ़ाना छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करने के उद्देश्य से है, ना कि किसी धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए।
नए टाइमटेबल के मुताबिक, कक्षा 8 से 10 तक के छात्रों को सोमवार से गुरुवार तक रोज 15 मिनट सुबह और 15 मिनट दोपहर में अतिरिक्त पढ़ाई करनी होगी। शुक्रवार को इस नियम में छूट दी गई है। इसके अलावा, साल में 204 कार्यदिवसों को पूरा करने के लिए 6 से 7 शनिवार भी स्कूलों में पढ़ाई के लिए निर्धारित किए गए हैं।
केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर लिया गया निर्णय
शिवनकुट्टी ने बताया कि यह बदलाव केरल हाईकोर्ट के अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार किए गए हैं। पिछला कैलेंडर जिसमें 25 शनिवार पढ़ाई के लिए शामिल थे, वह उचित मंजूरी के अभाव में अवैध माना गया था। इसके बाद एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई, जिसने कार्यदिवसों की पुनर्गणना कर प्रस्तावित शनिवारों को कम किया।
विवाद के बीच मंत्री का जवाब- “शिक्षा के साथ राजनीति मत खेलिए”
शिवनकुट्टी ने कहा कि कुछ लोग शिक्षा विभाग को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। जब UDF सरकार में लैब्बा कमेटी की सिफारिशों के बाद स्कूल समय सुबह 9 से शाम 4:30 बजे किया गया था, तब किसी ने सवाल नहीं उठाया। अब विरोध क्यों?उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात, यूपी, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से केरल से ज्यादा कार्यदिवस होते हैं। यही नहीं, राज्य के CBSE और ICSE स्कूलों में भी राज्य स्कूलों से अधिक पढ़ाई के घंटे हैं।
धार्मिक संगठनों का विरोध, सरकार ने बातचीत का दिया न्योता
मुस्लिम संगठनों जैसे कि समस्त केरल जमीयत उल उलेमा ने धार्मिक शिक्षा में बाधा बताते हुए इस बदलाव का विरोध किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि अगर किसी को संदेह है, तो हम चर्चा के लिए तैयार हैं। कानून बदलने के लिए विधानसभा में संशोधन जरूरी होता है।
शिवनकुट्टी ने कहा कि नए एकेडमिक कैलेंडर में नशा विरोधी अभियान, कला एवं खेल उत्सव, दिव्यांग छात्रों के लिए गतिविधियां और छात्रवृत्तियों को भी शामिल किया गया है, जिससे राज्य का पब्लिक एजुकेशन सिस्टम और समावेशी हो सके।
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