फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Delhi High Court refuses to permit Delhi University aspirants to interchange course and seats

DU HC: दो डीयू छात्रों की पाठ्यक्रम और सीट परस्पर बदलने की मांग याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने आंशिक राहत भी दी

Tue, 03 Jan 2023 04:06 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Tue, 03 Jan 2023 04:06 PM IST
सार

DU Admission : दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले पाने में सफल रहे दो उम्मीदवारों को अपने चुने हुए पाठ्यक्रम और सीटों को आपस में बदलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

विज्ञापन
Delhi High Court refuses to permit Delhi University aspirants to interchange course and seats
Delhi HC - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

DU Admission : दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले पाने में सफल रहे दो उम्मीदवारों को अपने चुने हुए पाठ्यक्रम और सीटों को आपस में बदलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस विभु बाखरू ने उनके इस दावे को भी खारिज कर दिया कि इस वर्ष की सामान्य सीट आवंटन प्रणाली (CSAS) असंवैधानिक थी। क्योंकि उसमें याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई सीटों में बदलाव आवंटन प्रणाली के संदर्भ में स्वीकार्य नहीं थे। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को कहा है कि उन छात्रों के अनुरोध को एक बारगी छूट के तौर पर मान लिया जाए।  

विज्ञापन

अदालत ने आदेश में कहा है कि यह न्यायालय सीएसएएस प्रणाली के साथ हस्तक्षेप करने के लिए कोई आधार नहीं पाता है। याचिकाकर्ताओं को ऐसी राहत की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, न्यायालय यह मानता है प्रतिवादियों दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज को इसे एकबारगी मामला मानते हुए छूट दे देना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की सामान्य सीट आवंटन प्रणाली (CSAS) को चुनौती निराधार थी और यह मानने का कोई कारण नहीं था कि यह मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद-14 या अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।  अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं के अनुरोधों पर विचार किया जाता है, तो यह एक मिसाल नहीं बनेगा। अदालत का यह भी विचार है कि यदि अन्य छात्रों के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है, तो प्रतिवादियों यानी डीयू और सेंट स्टीफंस कॉलेज को याचिकाकर्ताओं द्वारा किए गए अनुरोध पर विचार करना चाहिए। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed