इतिहास पर रार : विक्रम संपत का दावा, एनसीईआरटी की पुस्तकों में पढ़ाया जा रहा गलत और अधूरा इतिहास, दिखाए दस्तावेज
Controversy on Indian History: भारतीय इतिहासकार डॉ विक्रम संपत ने बुधवार को सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कहा कि स्कूली किताबों में देश का गलत और अधूरा इतिहास बच्चों को परोसा जा रहा है। उन्होंने एक चैनल पर संवाद कार्यक्रम में किए अपने दावे के समर्थन में अनेक दस्तावेज भी ट्विटर पर साझा किए।
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विस्तार
स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर जारी सियासी बवाल के बीच इतिहासकार डॉ विक्रम संपत के एक ट्वीट के बाद देशभर में असली और गलत भारतीय इतिहास पढ़ाने को लेकर फिर से बहस छिड़ गई है। उन्होंने देश में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में गलत और अधूरा इतिहास पढ़ाने के आरोप लगाए हैं। इसके बाद से वे कुछ अन्य इतिहासकारों के निशाने पर हैं। लेकिन संपत ने अपने आरोप और दावों के समर्थन में दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, यह कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन इसके सुर्खियों में आने के कई कारण हैं। 2022 में देश के पांच अहम राज्यों में चुनाव भी होने हैं। इसलिए, राजनीतिक दल भी इस विवाद को अपने -अपने तरकश के तीरों के जरिये हवा दे रहे हैं। खैर, हम सबसे पहले बात करते हैं कि असल विवाद क्या है?
भारतीय इतिहासकार डॉ विक्रम संपत ने बुधवार को सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए कहा कि स्कूली किताबों में देश का गलत और अधूरा इतिहास बच्चों को परोसा जा रहा है। उन्होंने एक चैनल पर संवाद कार्यक्रम में किए अपने दावे के समर्थन में अनेक दस्तावेज भी ट्विटर पर साझा किए। उन्होंने दावा किया कि एनसीईआरटी की किताबों में एक धर्म विशेष को तवज्जो दी गई है। ऐसा लगता है जैसे कि किताबें स्कूली शिक्षा के उद्देश्य से नहीं बल्कि मजहब का प्रचार-प्रचार करने एवं उसकी उदारवादी छवि बनाने के दृष्टिकोण से तैयार कर पढ़ाई जा रही हों। उन्होंने कहा कि पुस्तकों में भारतीय इतिहास और संस्कृति को अनुचित तरीके से बताया गया है।
डॉ संपत ने क्या कहा?
डॉ संपत ने ट्वीट करते हुए कहा कि पेशेवर इतिहासकारों और कुछ पागल ट्रोल्स की एक बटालियन ने मुझे, मेरे काम और जो कुछ भी मैंने मीडिया कॉन्क्लेव में डॉ शशि थरूर के साथ कहा था, को बदनाम करना शुरू कर दिया है। झूठ साबित करने के लिए एनसीईआरटी की किताबों के चुनिंदा स्क्रीनशॉट्स (सामान्य चाल!) का इस्तेमाल किया गया है। अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की नकली और हाथ की सफाई की जा सकती है तो उनके छात्रों पर दया आती है जो इसे दैनिक आधार पर झेलते हैं! कोई भी पूरी किताबें डाउनलोड कर सकता है और मेरी बात को पूरी तरह से प्रमाणित देख सकता है। एनसीईआरटी की संपूर्ण पुस्तकों के लिंक नीचे दिए गए हैं:
Have been used. If such fakery & sleight of hand can be done on social media pity their students who suffer this on a daily basis!
— Dr. Vikram Sampath, FRHistS (@vikramsampath) October 13, 2021
Given below are links of entire books of NCERT :
Class 6: https://t.co/UzlAoZ2GvT
Class 7: https://t.co/hVXMjSZ9mW
Class 8: https://t.co/cuy3AsEJ3Q
किताबों के स्क्रीन शॉट्स हो रहे वायरल
इतिहासकार डॉ संपत ने अपने दावों के समर्थन में ट्विटर पर कई दस्तावेज भी साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों में इतिहास के कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम छिपाए गए हैं। भारत और भारतीयों के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करते हुए खास वर्ग को महिमामंडित करने की कोशिश का जा रही है।उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर ऐसी किताबों के स्क्रीन शॉट्स वायरल होने लगे। उनके ट्वीट के समर्थन में भी सैकड़ों लोगों ने अपने बच्चों की किताबों के चित्र पोस्ट किए, जिनमें इतिहास को विकृत करने की कोशिश की गई है और खास समुदाय एवं मजहब की छवि को चमकाने का प्रयास किया गया है। इनके साथ NCERT ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। बता दें कि NCERT पहले भी पुस्तकों में महापुरूषों और सांस्कृतिक इतिहास को गलत तरीके से प्रदर्शित करने एवं विदेश आक्रांताओं को महिमामंडित करने के आरोपों को लेकर विवादों में रही है। मामला अदालत तक भी पहुंचा है।
डॉ संपत के समर्थन में उतरे लोग
डॉ संपत के ट्वीट के समर्थन में कई लोगों ने कथित तौर पर अपने बच्चों की NCERT वाली पुस्तकों की तस्वीरें साझा की हैं। इन पुस्तकों में साफ-साफ देखा जा सकता है कि तरह एक धर्म विशेष को महिमामंडित किया गया है। बता दें कि यह मामला कई अदालतों में विचाराधीन है। अप्रैल 2021 में जयपुर की एक निचली अदालत ने भी NCERT और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि NCERT ने कक्षा 12वीं की किताब में मुगल शासकों का 'महिमामंडन' किया है।
.. @vikramsampath ... I back u up on this... My son's history textbook https://t.co/zw3ONmyKeI pic.twitter.com/cd5SvVPyOj
— Maithili (@SuvarnBharat) October 13, 2021
शिक्षाविद डॉ एम मोहनदास पाई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी इस ओर ध्यान देने और पुस्तकों में बदलाव करने की मांग की है।
@dpradhanbjp Sir when will you as our Education Minister stop such fake history being taught in our schools? Stop such fake motivated writing and go with evidence and data based history!pl intervene! @narendramodi @PMOIndia @AmitShah https://t.co/oynV9ILfKq
— Mohandas Pai (@TVMohandasPai) October 13, 2021
The guy posted this map .I was wonderi g when there is no name of Bengal how come the NAME bay of begal is there.pls check it and correct https://t.co/V6vrYSX9DM ought to be kalinga sagar. pic.twitter.com/r4U3ZlDITy
— Pdebasis ଆମେ ଟିକା ନେବା ଆମ ପାଳିରେ,ମାସ୍କ ପିନ୍ଧିବା (@Pdebasis2) October 14, 2021
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