Report: 12 राज्यों में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ रहे छात्र, केंद्र ने राज्यों से की ठोस कदम उठाने की अपील
GER: केंद्र सरकार ने 12 राज्यों में माध्यमिक स्तर पर उच्च ड्रॉपआउट दर पर चिंता जताई है। NEP 2020 के तहत 2030 तक 100% नामांकन लक्ष्य के लिए राज्यों को घर-घर सर्वे व विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
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New Delhi: शिक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित करीब एक दर्जन राज्यों में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) पर स्कूली ड्रॉपआउट दर काफी अधिक पाई गई है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को सुझाव दिया है कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूल छोड़ने की दर कम करने के लिए विशेष कदम उठाएं।
रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों में भी माध्यमिक स्तर पर बड़ी संख्या में छात्र स्कूल छोड़ रहे हैं।
यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठकों के कार्यवृत्तों से सामने आई है। ये बैठकें समग्र शिक्षा योजना 2025-26 के तहत अप्रैल से मई 2025 के बीच विभिन्न राज्यों के साथ आयोजित की गई थीं।
2030 तक 100% नामांकन दर का लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक स्कूल स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio - GER) 100 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए, जैसा कि NEP 2020 में निर्धारित है। लेकिन बढ़ती ड्रॉपआउट दर इस लक्ष्य में बाधा बन रही है।
किन राज्यों की स्थिति चिंताजनक?
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश, झारखंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, पंजाब, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु जैसे राज्यों में 2023-24 में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर एक गंभीर चिंता का विषय रही।
- कर्नाटक में यह दर 22.1% है, जो कि राष्ट्रीय औसत 14.1% से काफी अधिक है।
- तमिलनाडु में यह दर 7.7% है, जहां GER अभी 82.9% है, जबकि NEP का लक्ष्य 100% है।
- पश्चिम बंगाल में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 17.87% पाई गई।
सरकार ने क्या उपाय सुझाए?
केंद्र ने इन राज्यों को सलाह दी है कि वे स्कूलों के कैचमेंट क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वे करें और स्कूल से बाहर गए बच्चों (Out-of-School Children - OoSC) की पहचान कर उन्हें फिर से स्कूल में दाखिल कराने के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाएं।
बिहार में PRABANDH पोर्टल पर रिपोर्टिंग में बड़े अंतर पाए गए, विशेषकर OoSC डेटा में। इसके चलते राज्य को निर्देश दिया गया है कि स्कूल प्रबंधन समितियों की मदद से व्यापक नामांकन अभियान चलाकर सभी बच्चों की पहचान व दाखिला सुनिश्चित करें।
दिल्ली की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 57.06% छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि कुल स्कूलों में इनकी हिस्सेदारी 48.99% है। PAB ने चिंता जताई कि सरकारी स्कूलों में नामांकन दर को लेकर स्थिति सुधारने की ज़रूरत है। साथ ही, GER और NER (Net Enrolment Ratio) को उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बेहतर करने की सिफारिश की गई है।
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