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UGC NET Paper Leak: यूजीसी नेट पेपर लीक का नहीं मिला कोई ठोस प्रमाण, सीबीआई ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट

Thu, 30 Jan 2025 03:20 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 30 Jan 2025 03:20 PM IST
सार

UGC NET 2024 Paper Leak: यूजीसी नेट पेपर लीक मामले की जांच के बाद सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भी भेजी है। अब अदालत तय करेगी कि इस रिपोर्ट को स्वीकार कर मामला बंद किया जाए या जांच जारी रखने के निर्देश दिए जाएं।
 

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CBI files closure report in UGC-NET 2024 paper leak case; No concrete evidence was found
सीबीआई - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

UGC NET Paper Leak Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने यूजीसी-नेट 2024 परीक्षा से जुड़े मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। अधिकारियों ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी दी। गौरतलब है कि परीक्षा के संबंध में यह दावा किया गया था कि परीक्षा का प्रश्नपत्र डार्कनेट पर लीक हुआ था और टेलीग्राम पर बेचा जा रहा था। इस विषय पर सीबीआई से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

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नहीं मिला पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण: सीबीआई

सीबीआई ने एक विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि पेपर लीक के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। एजेंसी ने इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भी भेजी है। अब अदालत तय करेगी कि इस रिपोर्ट को स्वीकार कर मामला बंद किया जाए या जांच जारी रखने के निर्देश दिए जाएं।

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पेपर का वायरल स्क्रीनशॉट फर्जी पाया गया: सीबीआई

जांच के दौरान सीबीआई को पता चला कि 18 जून 2024 को हुई परीक्षा के कथित 'लीक' प्रश्नपत्र का एक स्क्रीनशॉट एक छात्र ने सिर्फ पैसे कमाने के इरादे से शेयर किया था।

अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के दिन दोपहर में, जब यूजीसी-नेट की दूसरी पाली शुरू होने वाली थी, तब टेलीग्राम चैनलों पर प्रश्नपत्र प्रसारित किया गया, जिससे यह आभास हुआ कि पेपर लीक हो गया है।

जांच में पता चला कि जिसने यह स्क्रीनशॉट शेयर किया था, उसने इसमें जानबूझकर बदलाव किए थे। उसने छवि, तारीख और समय की मुहर को एडिट कर यह दिखाने की कोशिश की कि पेपर परीक्षा से पहले लीक हो गया था।

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11 लाख से अधिक ने कराया था पंजीकरण

यूजीसी-नेट परीक्षा के लिए 11 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। यह परीक्षा भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर पद और पीएचडी प्रवेश के लिए पात्रता तय करने के लिए होती है।

शिक्षा मंत्रालय ने 19 जून को परीक्षा रद्द कर दी थी, जब भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई ने इस संबंध में चेतावनी जारी की थी।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया, "गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से यूजीसी को कुछ इनपुट मिले थे, जिनसे संकेत मिला कि परीक्षा की सत्यता से समझौता किया गया है।" इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई।

सीबीआई ने पाया कि पेपर का कथित स्क्रीनशॉट एक स्कूली छात्र ने एक मोबाइल ऐप की मदद से बनाया था। एजेंसी ने फोरेंसिक विशेषज्ञों से परामर्श किया, जिन्होंने पुष्टि की कि स्क्रीनशॉट के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

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