विश्व कौशल प्रतियोगिता शंघाई 2026: स्मृति नांबियार को ‘बेस्ट ऑफ द नेशन’ सम्मान, भारत को कुल कितने पदक मिले?
WorldSkills Shanghai 2026: विश्व कौशल प्रतियोगिता शंघाई 2026 में भारतीय प्रतिभागियों ने छह रजत पदक जीते। बेकरी में स्मृति नांबियार ने रजत पदक के साथ ‘बेस्ट ऑफ द नेशन’ सम्मान भी हासिल किया। भारत प्रतियोगिता में 10वें स्थान पर रहा।
विस्तार
WorldSkills Shanghai 2026: चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता शंघाई 2026 में भारतीय प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने अलग-अलग कौशल श्रेणियों में कुल छह रजत पदक जीते। इनमें औद्योगिक डिजाइन, खुदरा बिक्री, बेकरी, डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन, दंत कृत्रिम अंग और रसद एवं माल ढुलाई जैसी श्रेणियां शामिल रहीं।
भारत की ओर से सबसे खास उपलब्धियों में बेकरी में स्मृति नांबियार का प्रदर्शन रहा। उन्होंने रजत पदक जीतने के साथ भारत के लिए प्रतिष्ठित ‘बेस्ट ऑफ द नेशन’ सम्मान भी हासिल किया।
स्मृति नांबियार ने सम्मान मिलने पर क्या कहा?
स्मृति नांबियार ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए एएनआई से कहा, “यह बहुत अच्छा लग रहा है... मुझे अभी पता चला कि मुझे बेस्ट ऑफ द नेशन पुरस्कार मिला है और मैंने इसे जीता है। मुझे रजत पदक भी मिला है और यह भी... मैं अपने सभी लोगों की बहुत आभारी हूं: अपने मार्गदर्शक, अपने परिवार, अपने माता-पिता और उन सभी रसोइयों की, जिनके साथ मैंने काम किया है। उन्हीं की वजह से मैं यह हासिल कर पाई।”
डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन में किसने जीता रजत?
डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन श्रेणी में कोविद अजय गंगराडे ने रजत पदक जीता। उन्होंने प्रतियोगिता के कई कठिन दौरों के बाद यह उपलब्धि हासिल की।
गंगराडे ने कहा, “यह बिल्कुल अविश्वसनीय है। यहां होना, पदक जीतना, आपकी सारी तैयारी और आपने जो मेहनत की है, उसे पूरी तरह सार्थक बना देता है।”
दंत कृत्रिम अंग श्रेणी में मोहम्मद सलाम की उपलब्धि क्या रही?
मोहम्मद सलाम ने दंत कृत्रिम अंग श्रेणी में भारत के लिए एक और रजत पदक जीता। उन्होंने प्रतियोगिता में कड़ी टक्कर के बीच यह उपलब्धि हासिल की।
सलाम ने एएनआई से कहा, “मैं बहुत खुश हूं; मैंने इस मुकाम तक पहुंचने और भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने के लिए बहुत मेहनत की है। सभी के सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। इस तरह की प्रतियोगिता में यह मेरा पहला अनुभव था; चार प्रतियोगी थे और अंतर बेहद कम था, लेकिन आज मैं यहां विजेता के रूप में खड़ा हूं... मैं अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहता हूं और भारत के कौशल को बेहतर बनाने में मदद करना चाहता हूं।”
खुदरा बिक्री में सानिया जोशी ने रचा इतिहास कैसे?
सानिया जोशी ने खुदरा बिक्री श्रेणी में रजत पदक जीता। यह इस श्रेणी में भारत की पहली भागीदारी थी।
जोशी ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हूं और भारत के लिए एक पदक लेकर आई हूं। मुझे बहुत खुशी है कि मैं यह कर पाई। मैं उन सभी लोगों की बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मेरी पूरी यात्रा में मेरा साथ दिया। यह पदक सिर्फ मेरा नहीं है—यह भारत के लिए है और यह उस हर व्यक्ति का है, जो इस यात्रा में मेरे साथ रहा है। मुझे पता है कि इस कौशल में भारत ने पहली बार हिस्सा लिया है और यह कौशल भी नया है। मैं बहुत खुश हूं कि पहली ही कोशिश में हमने पदक जीता और मेरी टीम आखिरकार यह कर पाई।”
मेहरुनिस्सा बेगम ने कैसे तय किया वैश्विक मंच तक का सफर?
मेहरुनिस्सा बेगम ने रसद और माल ढुलाई श्रेणी में रजत पदक जीता। उनका सफर एक प्रशिक्षण से शुरू होकर विश्व स्तर के मंच तक पहुंचा।
उन्होंने कहा, “मैं वास्तव में बता नहीं सकती कि कैसा महसूस हो रहा है, क्योंकि इसमें बहुत मेहनत लगी है, इसमें मैंने अपना पूरा दिल और आत्मा लगा दी। अब जब मैं यहां हूं, तो यह पदक मेरे लिए बहुत मायने रखता है- सच कहूं तो इसका बहुत महत्व है। मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं।”
अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा, “जब मैं अपने मुख्य विशेषज्ञ की कंपनी में प्रशिक्षण ले रही थी, तब मैंने पिछले प्रतियोगी की तैयारी देखी। इससे मुझे प्रेरणा मिली और मैंने उसी समय से हर चीज को देखना और समझना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे मैं आगे बढ़ी—राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं, क्षेत्रीय प्रतियोगिताएं और फिर इंडियास्किल्स। जब मुझे पता चला कि मैंने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है, तो मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इसके बाद तीन महीने तक कड़ी मेहनत की—काम, दिनचर्या, चिंता, हर चीज को संभालते हुए। और अब एक साल बाद मैं यहां हूं। मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि हर युवा जानता है कि उसमें कितनी ताकत है और उसके अंदर कितना जुनून और प्रतिभा है। बस उसे बाहर लाएं। अगर मैं यह कर सकती हूं, तो कोई भी कर सकता है। बस आगे बढ़िए और इसे कर दिखाइए।”
औद्योगिक डिजाइन तकनीक में पार्थ वोहरा ने क्या कहा?
पार्थ वोहरा ने औद्योगिक डिजाइन तकनीक श्रेणी में रजत पदक हासिल किया। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तहत तैयार संस्थागत व्यवस्था को भी दिया।
वोहरा ने एएनआई से कहा, “मैं यहां आकर और अपने देश के लिए पदक जीतकर वास्तव में गर्व और उत्साह महसूस कर रहा हूं। पिछले साल मैं घर पर बैठा था और मेरे एक शिक्षक ने मुझे इस प्रतियोगिता के लिए आवेदन करने को कहा। आवेदन करते समय मैंने नहीं सोचा था कि मैं देश का प्रतिनिधित्व करूंगा। सौभाग्य से, आज मैं ही पदक पहन रहा हूं और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है... मैं कौशल विकास मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमें यह अवसर देने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।”
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “युवाओं से मैं कहना चाहता हूं कि वहां बैठे मत रहिए। मैदान में आइए, अपने कौशल का प्रदर्शन कीजिए, इंडियास्किल्स के लिए आवेदन कीजिए और अगली बार आप वह व्यक्ति हो सकते हैं, जिसके हाथ में यह झंडा और पदक हो। पिछले साल मैंने इंडियास्किल्स की वेबसाइट पर आवेदन किया था। इसके कई चरण थे—राज्य स्तर, क्षेत्रीय स्तर और राष्ट्रीय स्तर। अगर आपके पास कौशल है, तो आप आगे बढ़ेंगे और इंडियास्किल्स प्रतियोगिता में सफल होने के बाद आप इसी मंच तक पहुंचते हैं।”
वर्ल्डस्किल्स में भारत किस स्थान पर रहा?
- 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता, शंघाई 2026 में भारत 10वें स्थान पर रहा। प्रतियोगिता का समापन चीन के शंघाई में हुआ।
- भारत ने इस प्रतियोगिता में छह रजत पदक और उत्कृष्टता के 20 पदक जीते।
- यह प्रदर्शन वर्ल्डस्किल्स लियोन 2024 की तुलना में बेहतर रहा। उस प्रतियोगिता में भारत 13वें स्थान पर रहा था और उसने चार कांस्य पदक तथा उत्कृष्टता के 12 पदक जीते थे।
वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारत की भागीदारी का समन्वय राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने किया। यह भागीदारी कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में हुई। इसमें क्षेत्र कौशल परिषदों, उद्योग भागीदारों, प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों ने भी सहयोग किया।
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