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स्क्रिप्ट राइटिंग...कलम से कमाओ बेशुमार
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2014 11:44 AM IST
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ऐसा क्यों होता है कि टीवी देखते हुए विज्ञापन आपको इतना पसंद आ जाते हैं कि उसकी लाइनें आप हर जगह बोलने लगते हैं। ये प्यास है बड़ी, नो उल्लू बनाविंग, थम्सअप...शर्मा जी...नई बीवी... दरअसल ये लाइनें अपनी कंपनियों के प्रोडक्ट के विज्ञापन के लिए स्क्रिप्ट राइटरों द्वारा लिखी जाती हैं। इन जिंगलों के जरिए ही टीवी पर किसी कंपनी का विज्ञापन हिट होता है। इन्हें लिखने वाले स्क्रिप्ट राइटरों की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि एक एक विज्ञापन के विचार और लेखन के लिए लाखों करोड़ों मिलते हैं।
जाने माने एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ और प्रसून जोशी का नाम तो सुना ही होगा आपने। एक अच्छा स्क्रिप्ट राइटर अपने दम पर एक विज्ञापन को घर घर पहुंचा सकता है। उसे ये सोच कर लिखना होता है कि इसके फिल्मांकन से कैसा असर होगा।
कुल मिलाकर इस फील्ड में कैरियर बनाने के लिए किसी भी व्यक्ति के अंदर रचनात्मकता का होना बहुत जरूरी है। कम से कम अल्फाज में अपने प्रोड्क्टस की विशेषताओं को ग्राहकों तक पहुंचाना होता है। ऐसे जिंगल्स बनाने होते हैं कि उसे सुनते ही उपभोक्ता के दिमाग में कंपनी का प्रोडक्ट आ जाए। हालांकि स्क्रिप्ट लाइटिंग के लिए किसी खास कोर्स की जरूरत नहीं लेकिन फिर भी इसे जर्नलिज्म के तहत पढाया जाता है।
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कल तक विज्ञापन ग्राहकों की संतुष्टि के लिए बनाए जाते थे लेकिन आज जो विज्ञापन आ रहे हैं वे ग्राहकों के संतोष के साथ उसकी खुशी और मनोरंजन को भी महत्व दे रहे हैं। मानवीय भावनात्मक पक्षों को छूते विज्ञापन न सिर्फ देर तक याद रहते हैं बल्कि उपभोक्ताओं के दिलो दिमाग पर गहरा असर छोड़ते हैं। जो लोग लिखने-पढ़ने में दिलचस्पी के साथ साथ मानवीय संवेदनाओं को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करने का हुनर रखते हैं उनके लिए भी इस फील्ड में बहुत मौके हैं।
अगर आपके भीतर भी ये रचनात्मकता और लेखन का हुनर है तो आप किसी संस्थान से जर्नलिज्म के कोर्स के दौरान इस विधा में महारत हो सकते हैं।
जर्नलिज्म का कोर्स आप इन संस्थानों से कर सकते हैं-
- जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा (बिहार)
- एमिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।
- इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।
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जाने माने एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ और प्रसून जोशी का नाम तो सुना ही होगा आपने। एक अच्छा स्क्रिप्ट राइटर अपने दम पर एक विज्ञापन को घर घर पहुंचा सकता है। उसे ये सोच कर लिखना होता है कि इसके फिल्मांकन से कैसा असर होगा।
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कुल मिलाकर इस फील्ड में कैरियर बनाने के लिए किसी भी व्यक्ति के अंदर रचनात्मकता का होना बहुत जरूरी है। कम से कम अल्फाज में अपने प्रोड्क्टस की विशेषताओं को ग्राहकों तक पहुंचाना होता है। ऐसे जिंगल्स बनाने होते हैं कि उसे सुनते ही उपभोक्ता के दिमाग में कंपनी का प्रोडक्ट आ जाए। हालांकि स्क्रिप्ट लाइटिंग के लिए किसी खास कोर्स की जरूरत नहीं लेकिन फिर भी इसे जर्नलिज्म के तहत पढाया जाता है।
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कल तक विज्ञापन ग्राहकों की संतुष्टि के लिए बनाए जाते थे लेकिन आज जो विज्ञापन आ रहे हैं वे ग्राहकों के संतोष के साथ उसकी खुशी और मनोरंजन को भी महत्व दे रहे हैं। मानवीय भावनात्मक पक्षों को छूते विज्ञापन न सिर्फ देर तक याद रहते हैं बल्कि उपभोक्ताओं के दिलो दिमाग पर गहरा असर छोड़ते हैं। जो लोग लिखने-पढ़ने में दिलचस्पी के साथ साथ मानवीय संवेदनाओं को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करने का हुनर रखते हैं उनके लिए भी इस फील्ड में बहुत मौके हैं।
अगर आपके भीतर भी ये रचनात्मकता और लेखन का हुनर है तो आप किसी संस्थान से जर्नलिज्म के कोर्स के दौरान इस विधा में महारत हो सकते हैं।
जर्नलिज्म का कोर्स आप इन संस्थानों से कर सकते हैं-
- जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा (बिहार)
- एमिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।
- इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।
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