Safalta Talks : बेहतर स्टोरी टेलिंग से युवा हासिल कर सकते हैं बड़ा मकाम : शोभित दीक्षित
- Master Class Session Topic : स्टोरी टेलिंग फॉर ए सक्सेसफुल कॅरिअर
- अतिथि : शोभित दीक्षित, सह-संस्थापक Korshine
विस्तार
सफलता.कॉम द्वारा स्टोरी टेलिंग फॉर ए सक्सेसफुल कॅरिअर विषय पर आयोजित किए गए मास्टर क्लास सेशन में कोर्शाइन कंपनी के को-फाउंडर शोभित दीक्षित ने युवाओं से कहा कि जो भी आपकी परिस्थिति हो आपको उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। वैसे तो हर पीढ़ी की अपनी अलग चुनौतियां होती हैं। 90s में युवाओं को कॅरिअर बनाने के लिए जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता था वो आज की पीढ़ी के युवाओं के लिए आसान हो गई हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं एक ब्रांड स्टोरीटेलिंग कंपनी रन कर रहा हूं। इसमें मेरा इंट्रेस्ट फिल्मों, किताबों और टीवी सीरियल्स से आया था। क्योंकि पहले लोग टीवी सीरियल देखते हैं। दो - तीन घंटे की पिक्चर के लिए वक्त निकालते थे। उसे एंन्ज्वाय करते थे। अब लोग हॉट स्टार, अमेजॉन प्राइम पर लोग वेबसीरीज देखने के शौकीन हैं।
बेहतर स्टोरीटेलिंग ने लोगों को घंटों तक वेबसीरीज से जोड़ने का काम किया
ऐसे भी लोग हैं जो अब 10 - 10 घंटे तक लगातार वेबसीरीज देखकर उसे खत्म कर रहे हैं। क्योंकि आजकल ब्रांड्स ने पता कर लिया है कि 10 घंटे तक आदमी को कैसे किसी स्टोरी के साथ जोड़ के रखना है। कहां एक्साइटमेंट दिखानी हैं कहां क्लाइमेक्स दिखाना है, अगले एपीसोड का प्ले बटन है वो अपने आप प्ले हो जाए ऐसा कुछ दिखाना है।
ब्रांड्स टच प्वाइंट्स को बनाते हैं बेहतर
दीक्षित ने कहा कि किसी भी ब्रांड के काम में टच प्वाइंट्स होते हैं। जैसे कई ब्रांड्स आज भी अपने एक्सपीरियंस पर नहीं वर्ड माउथ पब्लिसिटी के जरिये चल रहे हैं। लोग कहीं से सुनकर उत्पाद खरीद रहे हैं। जैसे आपको कोई कहे कि ये गाड़ी, स्कूटी, या बाइक खरीद लो मैंने चलाई है बहुत अच्छी है। वर्ड माउथ से चल रहे ब्रांड्स फिर कस्टमर्स के टच प्वाइंट्स को समझते हैं और उसे कॉफी टेबल बनाते हैं। जैसे एक बाइक खरीदने से पहले कस्टमर उसे देखने आता है उसके बारे में पता करने आता है। दूसरी बार कस्टमर बाइक के शो रूम पर बाइक खरीदने आता है। तीसरी बार सर्विस कराने और चौथी बार एसेस्सरीज इंस्टाल कराने आता है। तो ब्रांड्स ऐसे सभी टच प्वाइंट्स को अच्छा और प्रोफेशनल बनाने पर काम करते हैं।
आप जैसे हैं वैसे ही रहें
दीक्षित ने युवाओं से कहा कि सबसे पहले आप कोशिश करें कि जैसे आप हैं वैसे ही रहें। कई बार युवा इंटरव्यू में या किसी क्लाइंट के पास ऐसे जाते हैं जैसे वो वो न हों उनका एम्बेस्डर हो। जैसे आदमी रियल जिंदगी में कुछ और है और सोशल पर कुछ और है। बेहतर यही है कि जो आप हैं वही रहें। सच्चाई से सामने वाला आप पर विश्वास करेगा।
जो भाषा आती न हो उसमें संवाद न करें
ऐसे युवा अंग्रेजी में बात करने की कोशिश करते हैं जिनकी परवरिश हिंदी माध्यम से हुई है या किसी लोकल भाषा के बीच पले बढ़े हैं। तो जब आप घर पर अंग्रेजी में बात नहीं करते, दोस्तों से अंग्रेजी में नहीं बोलते फिर अचानक एचआर से कैसे अंग्रेजी में बात कर सकते हैं। ऐसे युवा जब अंग्रेजी बोलते हैं तो पकड़े जाते हैं। उन्होंने कहा ऐसी स्थिति में युवा उसी भाषा में संवाद करें जिसमें वो पारंगत हैं ना कि एक ऐसी भाषा में जिसका उन्हें अच्छा ज्ञान न हो। तो वही रहें जो आप हैं। सामने वाला भी आपकी सच्चाई देखकर आप पर विश्वास करना शुरू करता है।
रेज्यूमे की जगह बनाएं पोर्टफोलियो
युवाओं के पास सीवी होते हैं जिन्हें वो दिखा सकते हैं। या फोन पर इंटरव्यू हो रहा है तो आप वो आपकी आवाज सुनेगा आप से सवाल करेगा और आपके जवाब को समझेगा। फिर आपके बारे में फैसला लेगा। लेकिन जब आप फेस टू फेस किसी से मिलने जाते हैं तो आपके पास एक कहानी होनी चाहिए जिससे आप सामने वाले का विश्वास जीत सकें। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास सीवी बनाने के दो तरीके होते हैं जिसमें पहले में वो अपनी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, अनुभव, एड्रेस, नाम मोबाइल नंबर बगैरह लिखकर कंपनी को भेज देते हैं। दूसरा तरीका है सीवी को पोर्टफोलियो की तरह तैयार करना। जिसमें आपका सोशल हैंडल, आपका काम और आपने सभी अनुभव, प्रतियोगिताएं, पुरस्कार आदि सब लिखकर दिया जाता है। जिससे जब एचआर या सामने इंटरव्यू ले रहा व्यक्ति आपके बारे में महसूस कर सके, जान सके। पोर्टफोलियो में आप अपने शौक भी लिखें कि आपको क्या पसंद है जैसे कोई फोटोग्राफी करता है। कोई कविताएं लिखता है। कोई पेंटिंग्स बनाता है। किसी को घूमने का शौक है तो कोई किताबें पढ़ने का शौकीन है आदि। इसके अलावा अगर आपका कहीं लेख छपा हो। आपने कहीं टिप्पणी की हो उसका स्क्रीन शॉट भी पोर्टफोलियो में लगा सकते हैं।
कमेंट
कमेंट X