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रिवायतों की सफें तोड़कर बढ़ता जीएलए विश्वविद्यालय
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Aug 2016 05:45 PM IST
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ऋते ज्ञानान्न मुक्ति अर्थात् ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं। इसी उद्देश्य के साथ श्री नारायण दास अग्रवाल जी ने अपने पिता स्वर्गीय श्री गणेषी लाल अग्रवाल जी के सपने को पूरा करते हुए साल 1998 में मथुरा में जी.एल.ए. विश्वविद्यालय को स्थापित किया।
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आज जी.एल.ए. विश्वविद्यालय देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में शुमार है। जहां हर साल हजारों छात्र-छात्राएं प्रवेश पाकर अपने भविष्य को संवार रहे हैं।
इस साल 2016 में तकरीबन 3500 छात्र-छात्राओं ने जी.एल.ए. विश्वविद्यालय दाखिला लिया है। विश्वविद्यालय में आने वाले इन सभी विद्यार्थियों के लिए एक ऑरियंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान के साथ सभी फैकल्टी मैम्बर्स मौजूद रहे। साथ ही सभी ने विद्यार्थियों को अपने-अपने अंदाज में प्रोत्साहित किया।
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कुलसचिव ए. के. सिंह ने कहा, ‘‘जीवन में सफलता के लिए न केवल तीव्र बुद्धि की आवश्यकता होती है, बल्कि अनुशासन सफलता का दूसरा नाम है। जी.एल.ए. को एक अनुशासित विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है।
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जी.एल.ए. के कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने अपने चिर-परिचित अंदाज में शेर-ओ-शायरी और बॉलीवुड के डायलॉग के साथ न केवल विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया, बल्कि महफिल की रौनक भी बढ़ायी। नीरज अग्रवाल ने शेर पढ़ते हुए कहा ‘‘रिवायतों की सफें तोड़कर बढ़ो वरना... जो तुमसे आगे हैं वो रास्ता नहीं देंगे।’’
74 फीसदी विद्यार्थियों का प्लेसमेन्ट सीधे जी.एल.ए. कैंपस से ही हो जाता है, जी.एल.ए. विश्वविद्यालय का लक्ष्य इसको 100 फीसदी कैंपस प्लेसमेन्ट में बदलने का है। जी.एल.ए. से उत्तीर्ण विद्यार्थी देश-विदेश में नाम रौशन कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने कहा, ‘‘विद्या का मूल्य उद्देश्य ज्ञान के सहित अपने आचरण को भी उत्कर्ष बना है। इसलिए छात्रों को अपने आचरण को इतना श्रेष्ठ बनाना चाहिए कि लोग उनका अनुकरण करें।’’
प्रोफेशनल कोर्सो को करने के पीछे छात्रों का मकसद बेहतर प्लेसमेंट पाकर अपना उज्ज्वल भविष्य बनाना होता है। इसके लिए जी.एल.ए. यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों को प्लेसमेंट ओरयंटेड माहौल देती है।
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