एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए ब्रेक, जाने सही मायने
- ‘ब्रेक’ के सही मतलब को समझें
- ब्रेक लेने पर सोच लें दोबारा
- साल को बर्बाद न होने दें
- मानसिक रूप से तैयार हो जाएं
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विस्तार
एंट्रेंस एग्जाम में जैसे-जैसे कॉम्पिटिशन बढ रहा है, वैसे-वैसे स्टूडेंट्स में औपचारिक पढाई से ‘ब्रेक’ लेकर उनकी तैयारी का चलन भी बढा। अगर आप भी यह ब्रेक ले रहे हैं तो पूरी तैयारी के साथ लें ताकि साल बर्बाद न हो।
ब्रेक लेने का सही मतलब क्या है
कॉलेज की रेगुलर पढाई करने के बजाए सेल्फ स्टडी या कोचिंग की मदद से अगले साल होने वाले एग्जाम की तैयारी करने के लिए स्टूडेट्स ‘ब्रेक’ लेते हैं। उनका मानना होता है कि बारहवीं के दौरान उन पर बोर्ड एग्जाम्स का दबाव थ, इसलिए वे अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाए।
एक साल ‘ब्रेक’ के दौरान वे अपना पूरा ध्यान एंट्रेस एग्जाम की तैयारी पर लगाकर अगले साल अच्छी रैंक हासिल करने का लक्ष्य तय करके ‘ब्रेक’ लेने की सोचते हैं। कई बार स्टूडेंट्स पेरेंट्स को राजी करके पूरी तैयारी के साथ ब्रेक लेते हैं तो कुछ के ‘ब्रेक’ लेने से पूरे साल घर में तनाव का माहौल बना रहता है। ऐसे में ‘ब्रेक’ का फैसला नुकसान ही देता है।
एक बार फिर से विचार करें
अगर बारहवीं में पूरी मेहनत के बाद भी आप एंट्रेंस में अच्छा परिणाम नहीं नहीं ला पाए है तो यह मौका है कि आप अपने लक्ष्य के बारे में दोबारा सोचें।
हो सकता है कि किसी एंट्रेंस में असल में आपकी रुचि ही न हो फिर भी लोगों को देखकर आपने उसके लिए तैयारी की हो। अगर किसी दूसरी स्ट्रीम के कोर्स में आपकी रुचि जाग रही है तो उसे अपनाने से न शरमाएं।
अपने पेरेंट्स से खुलकर बात करें। आपको यकीन है कि अगले साल आप अच्छा कर पाएंगें तो पूरी तैयारी के साथ ‘ब्रेक’ ले लें।
खुद को तैयार करें
अगर लोगों के द्वारा दिखाए गए डर आप पर हावी होने लग जाएंगे। तो आप कभी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। अगला साल आने से पहले ही आपका यकीन खुद पर से उठ जाएगा। इसलिए कोशिश करें कि ‘ब्रेक’ के फै सले से कहीं आप ‘ब्रेक’ न हो जाएं।
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