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ऐसे बन सकते हैं डिटेक्टिव और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट

Vinita Sharmaविनीता शर्मा Updated Wed, 05 Nov 2014 01:25 PM IST
career in criminology field career in forensic science
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अपराध विज्ञानी या क्रिमिनोलॉजिस्ट का कार्यक्षेत्र लगातार विस्तृत होता जा रहा है। सामान्य अपराध से लेकर ऑनलाइन अपराध में भी इनकी मांग बनी रहती है। किसी भी तरह की आपराधिक घटना घटने पर पुलिस अपराध विज्ञानी की सहायता लेती है। भारत सरकार ने अपराध शास्त्र में अनुसंधान के लिए 1972 में राष्ट्रीय अपराध शास्त्र और फोरेंसिक विज्ञान संस्थान की स्थापना नई दिल्ली में की थी। साथ ही सरकार ने हैदराबाद, कोलकाता एवं चंडीगढ़ में तीन केंद्रीय फोरेंसिक प्रयोगशालाएं भी खोली हैं।
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इसके अतिरिक्त हैदराबाद में छानबीन में वांछित दस्तावेज की जांच के लिए एक सरकारी परीक्षक भी है। सभी राज्य सरकारों की अपनी अपराध विज्ञान प्रयोगशालाएं हैं, जो पुलिस को अपराधों की छानबीन में मदद करती हैं। गृह मंत्रालय के अंतर्गत पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो, नई दिल्ली फोरेंसिक विज्ञान और अपराध शास्त्र में अनुसंधान कराता है। इसके अलावा यह पांच क्षेत्रों में कनिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप भी प्रदान करता है। ये पांच क्षेत्र हैं- फोरेंसिक रसायन विज्ञान, फोरेंसिक जीव विज्ञान, डीएनए फिंगर प्रिंटिंग, फोरेंसिक भौतिक विज्ञान और फोरेंसिक डॉक्यूमेंट्स साइंस (कंप्यूटर धोखाधड़ी और साइबर अपराध सहित)। फेलोशिप तीन केंद्रीय फोरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं कोलकाता, हैदराबाद, चंडीगढ़ और वांछित दस्तावेजों के सरकारी परीक्षक, कोलकाता में अध्ययन के लिए प्रदान की जाती है।

कोर्स कैसे-कैसे
देश के कई विश्वविद्यालय फोरेंसिक विज्ञान में पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में डिग्री व डिप्लोमा दोनों ही हैं। डिप्लोमा कोर्स कम अवधि के होते हैं, जबकि डिग्री पाठ्यक्रमों की अवधि अधिक होती है। कुछ विश्वविद्यालयों में एकवर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स की सुविधा भी उपलब्ध है।

फोरेंसिक विज्ञान में रोजगार
फोरेंसिक विज्ञान में सर्टिफिकेट कोर्स करने के पश्चात रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं, परंतु यदि उम्मीदवार रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला लेना चाहिए। अपराध विज्ञान काफी विस्तृत क्षेत्र है। इसमें केवल अपराध विज्ञान में पढ़ाई कर सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती है। अपराध वैज्ञानिकों के लिए कई तरह के विषयों का ज्ञान जरूरी है, जैसे मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास आदि। इसलिए किसी एक विषय में विशेषज्ञता भी आवश्यक है। चूंकि यह क्षेत्र समाज से जुड़ा है, अत: समाज का मनोविज्ञान समझने एवं आंकड़ों की गहन जांच के लिए गणित विषय की अच्छी समझ, उच्च तार्किक क्षमता तथा मनोचिकित्सक के गुण वाले युवा इसमें अधिक सफल होते देखे गए हैं।

पाठ्यक्रमों का बदलता स्वरूप
क्रिमिनोलॉजी, फोरेंसिक साइंस, फिंगर प्रिंट एंड डॉक्यूमेंट एग्जामिनेशन आदि से संबंधित पाठ्यक्रम विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र में नित नए बदलावों के कारण पाठ्यक्रमों में भी बदलाव होता रहता है। हाल ही में साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए पाठ्यक्रम में संशोधन करते हुए साइबर अपराध यानी कंप्यूटर से संबंधित गहन प्रशिक्षण को भी सम्मिलित किया गया है।
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