CLAT 2020: तैयारी के लिए अपनाएं ये रणनीति, कोचिंग की भी जरूरत नहीं
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क्लैट 2019 की परीक्षा हाल ही में सफलतापूर्वक अयोजित की गई थी, जिससे लॉ के कई उम्मीदवारों को उनके पसंद का कॉलेज मिलने में मदद मिली। हालांकि, कुछ अंको के फर्क के कारण कुछ छात्रों को असफलता की निराशा का सामना करना पड़ा। ऐसे छात्रों के लिए यही सलाह है कि यह समय निराश होने का नहीं है, बल्कि की गई गलतियों को पीछे छोड़ नई रणनीति तैयार करने का समय है। अगली परीक्षा में अब बस कुछ समय बाकी है इसलिए तैयारी करने में देरी करना बेवकूफी है। प्रारंभिक तैयारी उन्हें क्लैट 2020 में अच्छा प्रदर्शन करने और सफलता पाने में मदद करेगी। लॉ की डिग्री को कई दशक से भारी लोकप्रियता मिलती आ रही है और इसका कारण यह है कि किसी भी स्ट्रीम (कॉमर्स हो या इंजीनियरिंग) का छात्र आसानी से इसका चयन कर सकता है। इसके अलावा, समाज में करियर और सम्मान के मामले में भी इसका बहुत स्कोप है।
रुचि है जरूरी :
लॉ में भविष्य और करियर की बात की जाए तो यह उतना भी आसान नहीं है जितना लोग समझते हैं। लॉ की तैयारी के लिए दृढ़ निश्चय, ध्यान और कठिन परिश्रम अनिवार्य है। इनके बिना अपने पसंद के कॉलेज में प्रवेश कर पाना संभव नहीं है, इसलिए आज से ही तैयारी में जी-जान लगा दें। जो लोग निराश होकर यह मान लेते हैं कि उनसे यह नहीं हो पाएगा, वह अपना सपना कभी पूरा नहीं कर पाते हैं और फिर जिंदगी भर निराशा का सामना करना पड़ता है। जाहिर है आप उनमें से नहीं हैं और अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा के साथ तैयारी करेंगे।
करियर की संभावनाएं :
लॉ की डिग्री करियर के विभिन्न अवसर प्रदान करती है, जिसके साथ आप पैरालीगल, जासूसी, वकील, जज, सामाजिक कार्य और एमएनसी और बैंक में कॉरपोरेट लॉयर जैसे विकल्पों में अपने पसंद के करियर का चुनाव कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आप खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। छात्रा और माता-पिता, दोनों के लिए यह समझना जरूरी है कि प्रवेश परीक्षा में सफलता के लिए प्रारंभिक कदम कितना मायने रखता है। माता-पिता को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि बच्चे को हसमुख और शांत वातावरण की जरूरत होती है, जिससे वह पूरे मन से और ध्यान लगाकर तैयारी कर पाता है। यह वातावरण उसे सफलता का रास्ता दिखाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे बनाएं रणनीति :
इस परीक्षा को क्रैक करने के लिए कठिन परिश्रम बहुत जरूरी है। आखिर वक्त में की गई तैयारी से छात्र को कुछ खास मदद नहीं मिलती, बल्कि इससे उसकी सफलता का रास्ता बंद हो सकता है। इसलिए शुरुआत से ही नियमित रूप से तैयारी करें और साथ ही उसका रिवीजन भी करते चलें। छात्रों को मल्टी चॉइस वाले प्रश्नों को नियमित रूप से हल करना चाहिए। यह उनकी समझ का विस्तार करता है और चीजों को याद रखने में भी आसानी होती है।
लॉ की प्रवेश परीक्षा के लिए तैयारी करना इतना भी मुश्किल नहीं है। आप सोच रहे होंगे कि कैसे, बात ये है कि यदि आप 1 साल पहले ही इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं और सारा ध्यान उसी पर केंद्रित रखते हैं तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता है। आप अपने सिलेबस को अच्छी तरह से समझ लें और उसी के आधार पर तैयारी करें।
• सामान्य ज्ञान
• लीगल एप्टीट्यूड
• अंग्रेजी
• लॉजिकल रीजनिंग
• गणित
प्रवेश परीक्षा का कठिनाई स्तर तब बढ़ जाता है जब एक छात्र के तौर पर हममें इन चीजों की कमी होती है।
1. टाइम मैनेजमेंट : एक छात्र के लिए 12वीं की बोर्ड परीक्षा पर ध्यान देना और साथ ही प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना बहुत जरूरी है। छात्रों के लिए दोनों परीक्षाओं के बीच संतुलन बनाकर रखना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि एक अंको के आधार पर कॉलेज में प्रवेश दिलाती है तो दूसरी प्रवेश परीक्षा के आधार पर एक बेहतरीन संस्थान में पढ़ने का मौका देती है।
2. अपडेट रहना है जरूरी : आमतौर पर अधिकांश प्रवेश परीक्षाएं अप्रैल के महीने में होती हैं यानी कि बोर्ड की परीक्षा के तुरंत बाद, जिसके कारण छात्रों के पास तैयारी के लिए बिल्कुल समय नहीं रह जाता है। समय रह जाता है तो बस रिवीजन करने का। इसलिए यह जरूरी है कि आप कई महीनों पहले से तैयारी कर रहे हों और बोर्ड की परीक्षा से पहले ही सारा सिलेबस पूरा कर लिया हो। इस तरह आप बोर्ड की परीक्षा के बाद अच्छे से रिवीजन कर सकेंगे, जो किसी भी तैयारी का एक अहम हिस्सा है।
3. नियमित अभ्यास : छात्रों को कुछ समय अभ्यास के लिए भी निकालना चाहिए, जिससे उनकी तैयारी में कोई कमी न आए। इसमें पिछले साल के पेपरों को हल किया जा सकता है। यह प्रश्नपत्र के फॉर्मेट को समझने में आपकी मदद करता है। मॉक टेस्ट को एक बड़ी संख्या में हल करने से काफी लाभ मिलता है। उदाहरण, परीक्षा के लीगल एप्टीट्यूड वाले भाग में आपको कठिन और रीजनिंग वाले सवालों को हल करना होता है, जिसमें आपकी समझ को परखा जाता है। मॉक टेस्ट सीरीज को नियमित रूप से हल करने से आपके ज्ञान का विस्तार होता है और हर विषय पर आपकी पकड़ मजबूत हो जाती है। आपको समझ आने लगता है कि किसी भी सवाल का जवाब किस तरह से देना है। इसलिए 1 साल की तैयारी छात्रों के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होती है। जब आप कई महीनो से तैयारी कर रहे होते हैं तो आपकी समझ और तैयारी को एक सही आकार मिल पाता है, जो लंबे समय तक बना रहता है।
4. प्लानिंग :
शुरुआत में सिलेबस बहुत बड़ा और कठिन नजर आता है, लेकिन जब इसको लेकर सही ढंग से रणनीति बनाई जाती है तो यह आसान लगने लगता है। यह कहावत बिल्कुल सही है कि निरंतर प्रयास आपके कॉन्फिडेंस को बढ़ाता है। इस तरह की परीक्षा की तैयारी के लिए हर दिन कम से कम कुछ घंटे निकालना जरूरी है, तभी इसे क्रैक किया जा सकता है। आप कितने भी व्यस्त हों लेकिन तैयारी के लिए कुछ समय जरूर निकालें।
उम्मीदवार होने के नाते छात्रों को मुश्किल भाग पर काम करना जरूरी है, जैसे कि शब्दावली (वोकेब्लरी)। शब्दावली को रातोंरात रटा नहीं जा सकता है और इसे बेहतर करने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत होती है। करंट अफेयर्स की तैयारी भी समय के साथ ही की जा सकती है क्योंकि यह वर्तमान की गतिविधियों को शामिल करता है इसलिए इसके लिए भी निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। कहा जाता है कि जिस चीज को लंबे समय से तैयार किया जाता है उसे भुला पाना आसान नहीं। यदि आप अभी से तैयारी शुरू कर देंगे और निरंतर प्रयास करेंगे तो आपका अपना सपना पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता है। आपको बस खुद पर और अपनी तैयारी पर विश्वास बनाए रखना है और कभी हार नहीं मानना है।
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