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West Bengal: राज्यपाल द्वारा अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति पर शिक्षा मंत्री का वार, लगाया 'तानाशाही' का आरोप

Mon, 04 Sep 2023 05:21 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 04 Sep 2023 05:21 PM IST
सार

West Bengal: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस द्वारा विश्वविद्यालयों के वीसी की नियुक्ति किए जाने पर शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने इसे राज्यपाल की तानाशाही बताया। 
 

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Bengal minister says Raj Bhavan acting in 'dictatorial' manner after Guv appoints interim VCs
CV Anand Bose - फोटो : Twitter/@KeralaGovernor

विस्तार

West Bengal: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राज्य के सात विश्वविद्यालयों के अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति की थी। इसके एक दिन बाद, शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने सोमवार को कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राजभवन पर "तानाशाही तरीके" से काम करने का आरोप लगाया है। मंत्री ने दावा किया है कि यह कदम विश्वविद्यालय प्रणाली को "नष्ट" कर सकता है।

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मंत्री ने यह भी कहा कि राज्यपाल का कदम "राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक का उल्लंघन है, जो विश्वविद्यालयों और राज्य सरकार के चांसलर के रूप में राज्यपाल की भूमिकाओं और कार्यों से संबंधित है"। राज्यपाल ने, राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में, रविवार रात को प्रतिष्ठित प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, MAKAUT और बर्दवान विश्वविद्यालय सहित सात विश्वविद्यालयों के लिए अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति की थी।
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बसु ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "राज्यपाल की हालिया कार्रवाई का उद्देश्य उच्च शिक्षा प्रणाली को दिवालिया बनाना है। वह संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों की विधियों को नष्ट कर रहे हैं। ऐसी नियुक्तियां किसी से परामर्श किए बिना की गई हैं। वह तानाशाही तरीके से काम कर रहे हैं।"
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उन्होंने कहा है कि कानून के अनुसार राज्यपाल राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। उन्हें सीमा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि हम राज्यपाल की ऐसी कार्रवाई पर चुप नहीं रहेंगे।


राज्य विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों सहित शिक्षाविदों के एक समूह ने राज्यपाल की कई विश्वविद्यालयों में अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति की कार्रवाई पर टिप्पणी कर इसे अवैध बताया है। एजुकेशनिस्ट फोरम ने यह भी कहा कि ऐसी नियुक्तियों से "राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को कोई फायदा नहीं होगा"।

सूत्रों ने कहा कि नौ अन्य विश्वविद्यालयों के अंतरिम कुलपतियों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है और नियुक्ति पत्र "जल्द ही जारी किए जाएंगे।"

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