Assam: असम में कोचिंग सेंटरों के लिए लागू होंगे सख्त नियम, राज्य सरकार ने विधानसभा में पेश किया विधेयक
Assam: असम सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए "असम कोचिंग इंस्टीट्यूट (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025" पेश किया, जिससे पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा बढ़ेगी।
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Assam: असम सरकार ने शुक्रवार को असम विधानसभा में "असम कोचिंग इंस्टीट्यूट (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025" पेश किया। इसका उद्देश्य निजी कोचिंग सेंटरों को नियमों के दायरे में लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है। यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करेगा ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
विधेयक के मुख्य बिंदु
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पंजीकरण अनिवार्य – सभी पुराने और नए कोचिंग संस्थानों को तय समय सीमा के अंदर पंजीकरण कराना होगा।
- स्पष्ट परिभाषाएं – "कोचिंग संस्थान", "ट्यूटर" और "पंजीकरण" जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
- आवेदन प्रक्रिया – संस्थानों को पाठ्यक्रम, समय-सारणी, फीस, आधारभूत संरचना और शिक्षकों की योग्यता की जानकारी देनी होगी।
- संचालन के नियम – सुरक्षा मानकों का पालन, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और छात्रों के लिए पर्याप्त सुविधाएं अनिवार्य होंगी। साथ ही, गलत दावे करने पर रोक होगी।
- आचार संहिता – फीस और छात्रों के परिणामों में पारदर्शिता जरूरी होगी। मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाओं और काउंसलिंग को अनिवार्य बनाया गया है।
- समावेशिता – हाशिए पर रहने वाले समूहों को सहायता और विकलांग छात्रों के लिए अनुकूल सुविधाएं देनी होंगी।
- निगरानी और दंड – जिला प्रशासन को निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
- अपील की प्रक्रिया – पंजीकरण और नियमों के पालन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक अपीलीय निकाय बनाया जाएगा।
यह भी पढ़ें: असम सरकार ने तीन नए विश्वविद्यालयों के विधेयक पेश किए, आठ मौजूदा विश्वविद्यालयों में संशोधन का प्रस्ताव
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह विधेयक कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता लाने और छात्रों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। शिक्षा मंत्री रणोज पेगू ने इसे कोचिंग सेक्टर में जवाबदेही, सुरक्षा और समावेशिता को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
निजी विश्वविद्यालयों पर नया संशोधन विधेयक
इसके अलावा, असम सरकार ने "असम निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025" भी विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक में निजी विश्वविद्यालयों के लिए कुछ सख्त नियम तय किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- विश्वविद्यालयों के प्रायोजक संस्थानों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी।
- धार्मिक रूपांतरण से जुड़े किसी भी प्रकार के कार्य पर प्रतिबंध।
- नए तकनीकी और चिकित्सा पाठ्यक्रमों को खोलने पर प्रतिबंध।
- हर तीन साल में सरकारी निरीक्षण।
राज्य में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना
असम सरकार ने राज्य विधानसभा में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े विधेयक भी पेश किए। ये विश्वविद्यालय हैं:
- मा कामाख्या विश्वविद्यालय (दर्रांग)
- एडटेक स्किल विश्वविद्यालय (तिनसुकिया)
- स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय (बीटीआर)
इसके अलावा, असम सरकार ने बोंगाईगांव, गुरुचरण, जगन्नाथ बारुआ, नागांव, उत्तर लखीमपुर, शिवसागर, शहीद कनकलता बारुआ और कोकराझार विश्वविद्यालयों के लिए संशोधन विधेयक भी पेश किया। इन संशोधनों के तहत नए विश्वविद्यालयों के पहले कुलपति (Vice Chancellor) की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। बाद में, यह नियुक्ति राज्यपाल की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जाएगी।
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