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सीबीएसई के बाद अब आईआईटी भी सिलेबस में कर सकता है कटौती, संशोधित पाठ्यक्रम होगा जारी
Sat, 11 Jul 2020 12:24 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Sat, 11 Jul 2020 12:24 PM IST
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IIT JEE Syllabus
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, (IIT- Indian Institute of Technology) जल्द ही समिति के सामने उनकी समीक्षा के लिए एक नया सिलेबस जारी करेगा। बता दें कि अब सीबीएसई की तर्ज पर जेईई के सिलेबस में 30% की कटौती के आधार पर पेपर सेट हो सकते हैं। अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बता दें कि हाल ही में सीबीएसई ने कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए छात्रों के लिए पाठ्यक्रम को 30 फीसदी तक कम कर दिया है।
एनटीए के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि संशोधित पुराने पाठ्यक्रम को समिति के समक्ष रखा गया है और विशेषज्ञों द्वारा यह देखा गया है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षा में पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्न सीबीएसई पाठ्यक्रम से आए हैं। अधिकारी ने कहा कि हालांकि, छात्र पहले ही तैयारी शुरू कर देते हैं, लेकिन सीबीएसई पाठ्यक्रम में बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
विषय विशेषज्ञ समिति के सदस्य ने कहा कि सीबीएसई के संशोधित पाठ्यक्रम ने पेपर सेटर्स के सामने पूरी तरह से अलग स्थिति पैदा कर दी है। चूंकि सीबीएसई बोर्ड ने पाठ्यक्रम को कम कर दिया है, इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। शिक्षकों का कहना है कि अब छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति होगी कि वो क्या पढ़ें या क्या नहीं।
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आईआईटी दिल्ली के निदेशक, रामगोपाल राव ने कहा, "हमें सिलेबस में हुए परिवर्तनों को देखना होगा और इस बदलाव को समिति के समक्ष रखना होगा। उन्हें यह जानना होगा कि पाठ्यक्रम के कुछ टॉपिक्स को अब शामिल नहीं किया जा सकता।
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एनटीए के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि संशोधित पुराने पाठ्यक्रम को समिति के समक्ष रखा गया है और विशेषज्ञों द्वारा यह देखा गया है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षा में पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्न सीबीएसई पाठ्यक्रम से आए हैं। अधिकारी ने कहा कि हालांकि, छात्र पहले ही तैयारी शुरू कर देते हैं, लेकिन सीबीएसई पाठ्यक्रम में बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
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विषय विशेषज्ञ समिति के सदस्य ने कहा कि सीबीएसई के संशोधित पाठ्यक्रम ने पेपर सेटर्स के सामने पूरी तरह से अलग स्थिति पैदा कर दी है। चूंकि सीबीएसई बोर्ड ने पाठ्यक्रम को कम कर दिया है, इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। शिक्षकों का कहना है कि अब छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति होगी कि वो क्या पढ़ें या क्या नहीं।
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आईआईटी दिल्ली के निदेशक, रामगोपाल राव ने कहा, "हमें सिलेबस में हुए परिवर्तनों को देखना होगा और इस बदलाव को समिति के समक्ष रखना होगा। उन्हें यह जानना होगा कि पाठ्यक्रम के कुछ टॉपिक्स को अब शामिल नहीं किया जा सकता।
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