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मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा का रोडमैप तैयार करने के लिए गठित की गई टास्क फोर्स

Wed, 02 Dec 2020 10:11 PM IST
गौरव पाण्डेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 02 Dec 2020 10:11 PM IST
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a task force has been setup for preparing a roadmap on imparting technical education in mother tongue
रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : ट्विटर (फाइल)

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने तकनीकी शिक्षा को मातृभाषा के अनुरूप ढालने के लिए एक रोडमैप तैयार करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की ओर से बुधवार को साझा की गई। 

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इसे लेकर मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि टास्क फोर्स का गठन सचिव की अध्यक्षता में किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग विभिन्न हितधारकों द्वारा किए गए सुझावों को ध्यान में रखेगा और एक महीने में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
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शिक्षा मंत्री ने यह फैसला एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया। उन्होंने कहा, 'आज की बैठक प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है जिससे छात्र अपनी मातृभाषा में चिकित्सा, इंजीनियरिंग और कानून जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा ले सकते हैं।'

उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। लेकिन, सक्षम प्रावधान बनाए जाने चाहिए ताकि केवल अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होने के कारण मेधावी छात्र तकनीकी शिक्षा से वंचित न रह जाएं और मातृभाषा में अपनी पढ़ाई कर सकें।

 

तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषा नीति की जरूरत: आईआईटी खड़गपुर

तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं की जरूरत पर आईआईटी जैसे संस्थान भी जोर दे रहे हैं। हाल ही में आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर वीके तिवारी ने कहा था कि न केवल स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा नीति तय की जाए बल्कि तकनीकी संस्थानों में भी यह नीति विकसित की जाए।

तिवारी ने तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषा को अपनाने को जरूरी बताया था। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर इस बारे में शिक्षा मंत्रालय के निर्णय की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि छात्रों को जब क्षेत्रीय भाषा और विशेष रूप मातृभाषा में पढ़ाया जाता है तो उनके लिए सीखना काफी आसान हो जाता है।

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