शाहीन बाग में चौकन्नी है युवाओं की टोली, पहचान छिपा कर आ रहे हैं संघ, वीएचपी के कार्यकर्ता
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एक अन्य वॉलेंटियर का कहना है कि संघ, बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े कार्यकर्ता भी पहचान छिपाकर आ रहे हैं। वह लोगों से आसानी से मेलजोल बढ़ाते हैं। इसके बाद मंच से बोल रहे लोगों के वीडियो बना रहे हैं। बताते हैं यही लोग वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करके शाहीन बाग में महिलाओं के प्रदर्शन को लेकर भ्रांति पैदा कर रहे हैं। 500 और 100 रुपये लेकर शाहीन बाग में प्रदर्शन करने का प्रचार भी इसी तरह के लोगों के प्रयास से शुरू हुआ था।
युवाओं की टोली सतर्क
बताते हैं शाहीन बाग में युवाओं की टोली लगातार चौकन्नी है। इस टोली के युवाओं की निगाह जासूसी करने के इरादे से आने वालों की तलाश में रहती है। एक अन्य वॉलेंटियर का कहना है कि लोग महिलाओं के प्रदर्शन पर 16 दिसंबर से लगातार बैठने की जिद को नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें यह नहीं मालूम हो पा रहा है कि इस आंदोलन के पीछे कौन लोग हैं?
कौन आंदोलन को किस तरह से सहायता कर रहा है और कैसे बिना किसी उपद्रव के संगठित तरीके से लगातार प्रदर्शन चल रहा है? वॉलेंटियर का कहना है कि इस तरह के सवाल तलाशने वाले इस प्रदर्शन को बदनाम करने के इरादे से मसाला ढूंढ रहे हैं, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। बताते हैं वॉलेंटियर्स की निगाह राज खोजने आए लोगों पर ही नहीं है, वह प्रदर्शन को शांति और अहिंसात्मक तरीके से चलाने पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। ताकि किसी को इसे बदनाम करने का अवसर न मिल पाए।
लोगों के सहयोग और स्वेच्छा से चल रहा है आंदोलन
वह पेशे से इंजीनियर है। गुरुग्राम की साफ्टवेयर फर्म में काम करता है। छह बजते-बजते शाहीन बाग में चार-पांच घंटे अपनी सेवाएं देता हैं। नाम नहीं बताया, लेकिन 27 साल का युवा कहता है कि उसने अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा लगातार प्रदर्शन जारी रहने तक खर्च करने का मन बताया है।
इस वॉलेंटियर का कहना है कि यह लोगों का मन में पैदा हुए भय के कारण चलाया गया प्रदर्शन है। सरकार ने एक बाद एक कई इस तरह के फैसले लिए हैं, जिससे मुसलमान अब सरकार के हर कदम को संदेह की निगाह से देख रहा है। उसका कहना है कि वह भी मुसलमान है। उसके पिता डिग्री कालेज में शिक्षक हैं। भाई उत्तर प्रदेश में चिकित्सक है। उसे भी भय लग रहा है।
वॉलेंटियर का कहना है कि इसमें भाजपा के लोग चाहे वामपंथियों या कांग्रेस या फिर आम आदमी पार्टी के नेताओं के सहयोग की खूब अफवाह फैलाएं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। यह लोगों के सहयोग और स्वेच्छा से चल रहा आंदोलन है।