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दिल्ली: पर्यावरणीय प्रवाह के बिना यमुना नहीं बन सकती नहाने योग्य, सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट

Tue, 27 Jul 2021 06:25 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 27 Jul 2021 06:25 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना को नहाने लायक बनाने के लिए इसमें प्रदूषकों के घुलने के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह 3 मिलीग्राम प्रति लिटर और 5 मिलीग्राम प्रति लिटर के दो मानक हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार पर्यावरणीय प्रवाह किसी नदी, नम क्षेत्र या तटीय इलाकों में जल की वह मात्रा होती है जो उसके इको सिस्टम और उसके लाभ को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। 

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yamuna cannot become bathable without environmental flow delhi government submitted report to ministry of jal shakti
यमुना में स्नान करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पानी के न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (एनवायरमेंटल फ्लो) के बगैर यमुना नहाने लायक नहीं बन सकती। दिल्ली सरकार ने ये जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट में दी है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राजधानी के 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से 22 दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्र के 13 कॉमन एफ्लूएंट ट्रीटमेंट (सीईटीपी) में से केवल छह ही डीपीसीसी के मानकों को पूरा करते हैं।  

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रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना को नहाने लायक बनाने के लिए इसमें प्रदूषकों के घुलने के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह 3 मिलीग्राम प्रति लिटर और 5 मिलीग्राम प्रति लिटर के दो मानक हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार पर्यावरणीय प्रवाह किसी नदी, नम क्षेत्र या तटीय इलाकों में जल की वह मात्रा होती है जो उसके इको सिस्टम और उसके लाभ को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। 
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23 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड पानी की जरूरत
वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईड्रोलोजी, रुड़की के एक अध्ययन में सिफारिश की गई है कि जल की 23 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड मात्रा हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से यमुना में छोड़ा जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि यमुना में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह न होने पर इसके पानी का नहाने लायक बनना मुश्किल है। 
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रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वजीराबाद से ओखला के 22 किलोमीटर के हिस्से, जो दो फीसदी से भी कम है, में कुल प्रदूषण की 80 फीसदी मात्रा शामिल होती है। शहर में शाहदरा, नजफगढ़ और बारापूला समेत 18 बड़े नाले हैं जिनका पानी यमुना में गिरता है। 

यमुना में आठ स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में केवल पल्ला और वजीराबाद के नमूने मानकों के अनुरूप मिले हैं। जानकारों के अनुसार अशोधित गंदा पानी और सीईटीपी से निकलने वाले अपशिष्ट यमुना में प्रदूषण का मुख्य कारण हैं। 

दिल्ली सरकार ने यमुना में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बीआईएस के मानकों को पूरा न करने वाले साबुन एवं डिटर्जेंट की बिक्री, भंडारण, परिवहन और मार्केटिंग पर जून में रोक लगा दी थी। 

35 में से 22 एसटीपी नहीं कर रहे मानकों को पूरा
डीपीसी ने भी मंत्रालय को बताया कि 35 एसटीपी में से केवल 22 वेस्ट वाटर संबंधी टोटल सोल्यूबल सॉलिड (टीएसएस), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), बॉयोलोजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), डिसोल्वर्ड फॉस्फेट एवं अमोनिया नाइट्रोजन मानकों को पूरा नहीं करते। 


डीपीसीसी के अनुसार टीएसएस का स्तर 10 मिलीग्राम प्रति लिटर, बीओडी का स्तर 10 मिलीग्राम प्रति लिटर तथा सीओडी का स्तर 50 मिलीग्राम प्रति लिटर से कम होना चाहिए। वहीं अमोनिया नाइट्रोजन तथा फॉस्फेट का स्तर पांच व दो मिलीग्राम प्रति लिटर से कम होना चाहिए। 

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