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उपहार अग्निकांड : 24 साल बाद पीड़ित परिवारों के भरे जख्म
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सर्वेश कुमार
नई दिल्ली। उपहार अग्निकांड से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अदालत के फैसले से इस घटना में अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्मों पर 24 साल, चार महीने बाद न्याय का मरहम लगा है। अपने बच्चों को खो देने वाले माता पिता की आंखों के आंसू के सैलाब में दोषियों की खुद को बचाने की कोशिशें बह गईं।
गमजदा परिवारों को लंबे अर्से बाद न्याय मिलने से सुकून के कुछ पल मिले हैं। बेटी की सगाई का इंतजार करते पिता की नम आंखों से छलकते आंसू इस अग्निकांड की तपिश को एक बार दोहरा रही हैं।
एसोसिएशन ऑफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजडी (अव्युत) का नेतृत्व कर रही नीलम कृष्णामूर्ति ने न्याय मिलने पर कहा कि यह सभी परिवारों की जीत है। अपनों को खो देने के गम की भरपाई न्याय से ही हो सकती थी। बकौल कृष्णामूर्ति नहीं मालूम था कि बॉर्डर मूवी देखने के बाद उनकी बेटी उन्नति और 13 वर्षीय पुत्र उज्जवल नहीं लौटेंगे।
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अपने बच्चों को खोने के बाद बस उन्हें न्याय दिलवाने की जद्दोजहद में जिंदगी के कई पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिला। दिल्ली के अग्रणी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को तो नहीं देख सकी, लेकिन न्याय मिलने से सुकून का पहला पल मिला है। उन्नति बड़ी होकर कंपनी सेक्रेटरी बनना चाहती थी।
शुक्रवार को अदालत ने जब गोपाल अंसल और सुुशील अंसल सहित अन्य को दोषी करार तो इस फैसले को सुनकर पीड़ित परिवारों के चेहरे की मायूसी कम हुई। न्याय से न केवल जीत मिली बल्कि विश्वास फिर कई गुना बढ़कर लौटा है। एक पिता को बेटी की सगाई तो एक मां को बेटी की ख्वाहिश अधूरी रहने का गम अभी भी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान से बीए कर रही तारिका को अपने परिवार के सदस्यों के साथ बड़े भाई के जन्म दिन के बाद अगले दिन गोवा जाने की तैयारी में थे। उनकी प्लानिंग रात के शो में मूवी जाने की थी, लेकिन तारिका ने कंशेसन टिकट मिलने के बाद पापा को बताया कि अपनी दोस्त रूबी के साथ मूवी देखने जा रही है। बेटी की वो बातें आज भी पापा के कानों में गूंज रहे हैं, मैं मूवी से लौटकर जाने की तैयारी कर लूंगी। पिता नवीन साहनी को इस बात का भी गम है कि बेटी की सगाई अमेरिका में आईटी कंपनी में काम करने वाले युवक से तय हो गई थी।
परिवार की खुशियां इस तरह छिन गईं जैसे ये शब्द उनके परिवार में शायद कभी नहीं लौटे। न्याय मिलने के बाद पिता ने कहा कि इस लड़ाई में नीलम कृष्णामूर्ति सहित एसोसिएशन के सदस्यों के सहयोग को ताउम्र नहीं भूल सकते हैं।
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नई दिल्ली। उपहार अग्निकांड से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अदालत के फैसले से इस घटना में अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्मों पर 24 साल, चार महीने बाद न्याय का मरहम लगा है। अपने बच्चों को खो देने वाले माता पिता की आंखों के आंसू के सैलाब में दोषियों की खुद को बचाने की कोशिशें बह गईं।
गमजदा परिवारों को लंबे अर्से बाद न्याय मिलने से सुकून के कुछ पल मिले हैं। बेटी की सगाई का इंतजार करते पिता की नम आंखों से छलकते आंसू इस अग्निकांड की तपिश को एक बार दोहरा रही हैं।
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एसोसिएशन ऑफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजडी (अव्युत) का नेतृत्व कर रही नीलम कृष्णामूर्ति ने न्याय मिलने पर कहा कि यह सभी परिवारों की जीत है। अपनों को खो देने के गम की भरपाई न्याय से ही हो सकती थी। बकौल कृष्णामूर्ति नहीं मालूम था कि बॉर्डर मूवी देखने के बाद उनकी बेटी उन्नति और 13 वर्षीय पुत्र उज्जवल नहीं लौटेंगे।
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अपने बच्चों को खोने के बाद बस उन्हें न्याय दिलवाने की जद्दोजहद में जिंदगी के कई पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिला। दिल्ली के अग्रणी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को तो नहीं देख सकी, लेकिन न्याय मिलने से सुकून का पहला पल मिला है। उन्नति बड़ी होकर कंपनी सेक्रेटरी बनना चाहती थी।
शुक्रवार को अदालत ने जब गोपाल अंसल और सुुशील अंसल सहित अन्य को दोषी करार तो इस फैसले को सुनकर पीड़ित परिवारों के चेहरे की मायूसी कम हुई। न्याय से न केवल जीत मिली बल्कि विश्वास फिर कई गुना बढ़कर लौटा है। एक पिता को बेटी की सगाई तो एक मां को बेटी की ख्वाहिश अधूरी रहने का गम अभी भी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान से बीए कर रही तारिका को अपने परिवार के सदस्यों के साथ बड़े भाई के जन्म दिन के बाद अगले दिन गोवा जाने की तैयारी में थे। उनकी प्लानिंग रात के शो में मूवी जाने की थी, लेकिन तारिका ने कंशेसन टिकट मिलने के बाद पापा को बताया कि अपनी दोस्त रूबी के साथ मूवी देखने जा रही है। बेटी की वो बातें आज भी पापा के कानों में गूंज रहे हैं, मैं मूवी से लौटकर जाने की तैयारी कर लूंगी। पिता नवीन साहनी को इस बात का भी गम है कि बेटी की सगाई अमेरिका में आईटी कंपनी में काम करने वाले युवक से तय हो गई थी।
परिवार की खुशियां इस तरह छिन गईं जैसे ये शब्द उनके परिवार में शायद कभी नहीं लौटे। न्याय मिलने के बाद पिता ने कहा कि इस लड़ाई में नीलम कृष्णामूर्ति सहित एसोसिएशन के सदस्यों के सहयोग को ताउम्र नहीं भूल सकते हैं।