फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Uphaar cinema fire: Sushil and Gopal Ansal guilty of tampering with evidence

उपहार सिनेमा अग्निकांड: साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले में सुशील और गोपाल अंसल दोषी

Sat, 09 Oct 2021 05:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 09 Oct 2021 05:01 AM IST
सार

13 जून 1997 को बॉर्डर फिल्म के शो के दौरान लगी थी आग। अंसल बंधुओं को पहले मामले में सुनाई गई थी दो-दो साल कैद की सजा।

विज्ञापन
Uphaar cinema fire: Sushil and Gopal Ansal guilty of tampering with evidence
उपहार सिनेमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अदालत ने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ मामले में रियल एस्टेट व्यवसायी सुशील और गोपाल अंसल को अदालत ने दोषी ठहराया है। 13 जून 1997 को बॉर्डर फिल्म के शो के दौरान सिनेमा हॉल में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। 

विज्ञापन


पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा ने कोर्ट के पूर्व कर्मी दिनेश चंद शर्मा के साथ दो अन्य लोगों पी पी बत्रा और अनूप सिंह को भी दोषी ठहराया है। अदालत सोमवार को दोषियों की सजा पर अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनेगी। दोषियों को आजीवन कारावास तक सजा हो सकती है। 
विज्ञापन


अदालत ने सभी दोषियों के आय प्रमाणपत्र सोमवार तक पेश करने के निर्देश दिए हैं ताकि पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए मुआवजा राशि तय की जा सके। 
उपहार अग्निकांड से जुड़े मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुशील और गोपाल अंसल को दो साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि अदालत ने दोनों आरोपियों को काटी गई सजा और 30-30 करोड़ रुपये जुर्माने लगाकर रिहा कर दिया था। जुर्माने की इस राशि का इस्तेमाल राजधानी में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में किया जाना था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, मामले में दो आरोपियों हर स्वरूप पंवार और धर्मवीर मल्होत्रा की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। यह मामला पीड़ितों की ओर से नीलम कृष्णामूर्ति की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया था। 

पीड़ितों को धमकी का मामला विचाराधीन

उपहार अग्निकांड मामले में अंसल बंधुओं पर आगे भी शिकंजा कसेगा। अभी इन पर दो मामले विचारधीन हैं। इनमें से एक में अंसल बंधुओं पर एक पीड़ित को धमकी देने का आरोप है। जबकि दूसरा पासपोर्ट के साथ हेराफेरी का मामला है। उधर, लंबे अर्से से चल रही कार्रवाई के बीच अंसल बंधुओं की वित्तीय सेहत भी खस्ता हो गई है। रीयल एस्टेट का कारोबार महामारी के दौर में ठप पड़ गया है।

उपहार अग्निकांड मामले में सुशील और गोपाल अंसल के खिलाफ पहले से ही पासपोर्ट मामला लंबित है। इसके तहत अदालत में पासपोर्ट जमा होने के बावजूद इन लोगों ने विदेश यात्राएं की थी। इस मामले की सुनवाई चल रही है। दूसरी तरफ मामले की एक पीड़िता को धमकी देने का भी आरोप अंसल बंधुओं पर है। इस मामले में पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। अगर दोनों मामलों में दोषी सिद्ध होते हैं तो इन पर कानून का शिंकजा और कसेगा। ऐसे में इनको राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है।

दूसरी तरफ अदालत में लंबे समय से विचाराधीन मामलों का असर रियल एस्टेट कारोबार पर भी पड़ा है। महामारी काल में पहले ही रियल एस्टेट कारोबार प्रभावित हुआ है। कानूनी शिकंजा कसने से कारोबारी रिश्तों पर भी असर पड़ेगा। कारोबार में साथ-साथ काम कर रहे दूसरे कारोबारी साथ छोड़ सकते हैं। सजा सख्त होने की सूरत में आर्थिक नुकसान की भरपाई हो पाना संभव नहीं होगी। दोनों भाईयों को दोषी करार देने के बाद सुनाई जाने वाली सजा से इनका भविष्य तय होगा। 

जबकि हादसे से पहले अंसल समूह का रीयल एस्टेट कारोबार में दबदबा था। दिल्ली-एनसीआर में इस समूह ने कई प्रोजेक्ट पर काम किया है। वहीं, अभी भी कुछ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उनकी बढ़ती मुश्किलों से उबरने से पहले ही सुनवाई में दोषी करार दिए जाने से परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं।




 

आरोपियों को भ्रम था वे सजा से बच जाएंगे ....

अदालत ने उपहार अग्निकांड से जुड़े मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि आरोपियों को भ्रम था कि अपने गलत मंसूबों के चलते वे सजा से बच जाएंगे, ये अब दुनिया के सामने आ चुका है। 

पटियाला हाउस अदालत के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि अंसल बंधुओं, दिनेश चंद शर्मा, बत्रा और सिंह पर आपराधिक साजिश, साक्ष्य गायब होने और सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वासघात करने का आरोप संदेह से परे साबित हुआ है।

अदालत ने कहा कि दोषियों ने उन दस्तावेजों को नष्ट कर दिया जिनसे मुख्य केस में उनकी संलिप्तता साबित हो सकती थी। उन्होंने सजा से बचने के लिए साजिश के तहत चुनकर खास दस्तावेज व साक्ष्य नष्ट किए। इस तरह दोषियों ने मुकदमे की सुनवाई में बाधा पहुंचाई और न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया। 

अदालत ने कहा कि दोषियों ने जिस तरह न्याय प्रक्रिया को अपवित्र किया वह न्यायिक शासन प्रणाली को दूषित करने से कम नहीं था। दस्तावेज और साक्ष्यों से किसी भी तरह लाभ लेने की दोषियों का कृत्य दिखाता है उनके मन में न्यायिक प्रक्रिया के लिए कोई सम्मान नहीं है, जबकि ये हमारे लोकतंत्र का आधार है। दोषियों ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed