फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Uphaar Cinema Fire, after 24 years the victims got relief

उपहार सिनेमा अग्निकांड: बिटिया के सीएस बनने की ख्वाहिश अधूरी रह जाने का गम, 24 साल बाद पीड़ितों को मिला सुकून

Sat, 09 Oct 2021 06:15 AM IST
Jeet Kumar सर्वेश कुमार, नई दिल्ली।
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 09 Oct 2021 06:15 AM IST
सार

दिल्ली के अग्रणी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को तो नहीं देख  सकी, लेकिन न्याय मिलने से सुकून का पहला पल मिला है। उन्नति  बड़ी होकर कंपनी सेक्रेटरी बनना चाहती थी।
 

विज्ञापन
Uphaar Cinema Fire, after 24 years the victims got relief
उपहार अग्निकांड - फोटो : Social Media

विस्तार

उपहार अग्निकांड से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में अदालत के फैसले से इस घटना में अपनों को खो देने वाले परिवारों के जख्मों पर 24 साल, चार महीने बाद न्याय का मरहम लगा है।

विज्ञापन


एसोसिएशन ऑफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजडी (अव्युत) का नेतृत्व कर रही नीलम कृष्णामूर्ति ने न्याय मिलने पर कहा कि यह सभी परिवारों की जीत है। अपनों को खो देने के गम की भरपाई न्याय से ही हो सकती थी।
विज्ञापन


बकौल कृष्णामूर्ति नहीं मालूम था कि बॉर्डर मूवी देखने के बाद उनकी बेटी उन्नति और 13 वर्षीय पुत्र उज्जवल नहीं लौटेंगे। अपने बच्चों को खोने के बाद बस उन्हें न्याय दिलवाने की जद्दोजहद में जिंदगी के कई पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन


भाई के जन्मदिन की तैयारी कर रही थी तारिका
अपने बच्चों को खो देने वाले माता-पिता की आंखों के आंसू के सैलाब में दोषियों की खुद को बचाने की कोशिशें बह गईं। गमजदा परिवारों को लंबे अर्से बाद न्याय मिलने से सुकून के कुछ पल मिले हैं। बेटी की सगाई का इंतजार करते पिता की नम आंखों से छलकते आंसू इस अग्निकांड की तपिश को एक बार दोहरा रही हैं।

शुक्रवार को अदालत ने जब गोपाल अंसल और सुशील अंसल सहित अन्य को दोषी करार तो इस फैसले को सुनकर पीड़ित परिवारों के चेहरे की मायूसी कम हुई। न्याय से न केवल जीत मिली बल्कि विश्वास फिर कई गुना बढ़कर लौटा है। एक पिता को बेटी की सगाई तो एक मां को बेटी की ख्वाहिश अधूरी रहने का गम अभी भी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान से बीए कर रही तारिका को अपने परिवार के सदस्यों के साथ बड़े भाई के जन्म दिन के बाद अगले दिन गोवा जाने की तैयारी में थे। उनकी प्लानिंग रात के शो में मूवी जाने की थी, लेकिन तारिका ने कंशेसन टिकट मिलने के बाद पापा को बताया कि अपनी दोस्त रूबी के साथ मूवी देखने जा रही है।

बेटी की वो बातें आज भी पापा के कानों में गूंज रहे हैं, मैं मूवी से लौटकर जाने की तैयारी कर लूंगी। पिता नवीन साहनी को इस बात का भी गम है कि बेटी की सगाई अमेरिका में आईटी कंपनी में काम करने वाले युवक से तय हो गई थी।  


परिवार की खुशियां इस तरह छिन गईं जैसे ये शब्द उनके परिवार में शायद कभी नहीं लौटे। न्याय मिलने के बाद पिता ने कहा कि इस लड़ाई में नीलम कृष्णामूर्ति सहित एसोसिएशन के सदस्यों के सहयोग को ताउम्र नहीं भूल सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed