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73वें स्थापना दिवस पर अणुव्रत संवाद का आयोजन, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिया हिस्सा
Thu, 04 Mar 2021 11:08 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 04 Mar 2021 11:08 PM IST
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अणुव्रत संवाद का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
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73वें अणुव्रत स्थापना दिवस पर गुरुवार को दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में अणुव्रत संवाद का आयोजन किया गया। इस खास कार्यक्रम में अपने संदेश में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि अणुव्रत का मतलब है नैतिकता को अपने जीवन में उतारना। आज के समय में अणुव्रत व्रत सभी को लेने की जरूरत है।
उन्होंने संदेश में कहा कि अणुव्रत हमें अध्यात्म से भी जोड़ता है जिससे हम दूर चले जा रहे हैं। मेघवाल ने बताया किसी प्रकार अपने राजनैतिक जीवन में अणुव्रत को अपनाकर उन्होंने सफलता अर्जित की है। उन्होंने कहा कि वे अपने चुनाव प्रचार में शराब और पैसे नहीं बांटने का संकल्प ले चुके हैं। उनका यह संकल्प उनकी जीत में सहयोगी बना है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद लेखक वेद प्रताप वैदिक ने अणुव्रत से अपने जुड़ाव को बताते हुए कहा कि हम अणुव्रत से जुड़े हैं और इनके संदेश को जनजन तक पहुंचाने के लिए लगातार लोगों को प्रेरित करते रहे हैं।
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अणुव्रत विश्व भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष संचय जैन ने कहा कि सात दशक से निरंतर चल रहे अणुव्रत आंदोलन की प्रासंगिकता स्वत: सिद्ध है। आज बढ़ती भोगवादी संस्कृति के चलते व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर जो समस्याएं खड़ी हो रही है उनका समाधान अणुव्रत की संयम प्रधान जीवन शैली में निहित है।
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उन्होंने संदेश में कहा कि अणुव्रत हमें अध्यात्म से भी जोड़ता है जिससे हम दूर चले जा रहे हैं। मेघवाल ने बताया किसी प्रकार अपने राजनैतिक जीवन में अणुव्रत को अपनाकर उन्होंने सफलता अर्जित की है। उन्होंने कहा कि वे अपने चुनाव प्रचार में शराब और पैसे नहीं बांटने का संकल्प ले चुके हैं। उनका यह संकल्प उनकी जीत में सहयोगी बना है।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद लेखक वेद प्रताप वैदिक ने अणुव्रत से अपने जुड़ाव को बताते हुए कहा कि हम अणुव्रत से जुड़े हैं और इनके संदेश को जनजन तक पहुंचाने के लिए लगातार लोगों को प्रेरित करते रहे हैं।
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अणुव्रत विश्व भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष संचय जैन ने कहा कि सात दशक से निरंतर चल रहे अणुव्रत आंदोलन की प्रासंगिकता स्वत: सिद्ध है। आज बढ़ती भोगवादी संस्कृति के चलते व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर जो समस्याएं खड़ी हो रही है उनका समाधान अणुव्रत की संयम प्रधान जीवन शैली में निहित है।