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Delhi News: बंद दरवाजे पर ही दौड़ेगी ट्रेन, गलत दिशा में गेट खुलने पर पाबंदी
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रिठाला-नरेला-नाथूपुर कॉरिडोर के लिए खरीदे जा रहे 68 नए कोचों में अत्याधुनिक डोर सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत रिठाला-नरेला-नाथूपुर (रेड लाइन विस्तार) कॉरिडोर पर चलने वाली नई मेट्रो ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए दरवाजों को बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जाएगा। डीएमआरसी ने 68 नए ब्रॉड गेज कोचों की खरीद के लिए जारी तकनीकी विनिर्देशों में स्पष्ट किया है कि ट्रेन के दरवाजों का डिजाइन इस प्रकार होगा कि दरवाजा खुला रहने पर ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकेगी।
गलत दिशा की ओर दरवाजे नहीं खुलेंगे और किसी यात्री का कपड़ा या सामान फंसने की स्थिति में ट्रेन स्वत: रुक जाएगी। ये सभी सुरक्षा प्रावधान नए रोलिंग स्टॉक के लिए अनिवार्य होंगे। नई ट्रेनों में लगाया जाने वाला डोर कंट्रोल सिस्टम केवल दरवाजा खोलने और बंद करने तक ही नहीं होगा, बल्कि यह ट्रेन संचालन से सीधे जुड़ा सुरक्षा तंत्र होगा। ट्रेन तभी चल सकेगी जब सभी दरवाजे पूरी तरह बंद और लॉक होने की पुष्टि हो जाएगी। यदि किसी भी कोच का दरवाजा सही तरीके से बंद नहीं होता, तो ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गलत दिशा में दरवाजा खुलने से रोकने की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। प्लेटफॉर्म जिस ओर होगा, उसी ओर के दरवाजे खुलेंगे। दूसरी ओर के दरवाजे तकनीकी रूप से लॉक रहेंगे, जिससे दुर्घटना की आशंका कम होगी।
दस्तावेज में एंटी-ड्रैग तकनीक को भी अनिवार्य सुरक्षा फीचर के रूप में शामिल किया गया है। यदि किसी यात्री का दुपट्टा, साड़ी, बेल्ट या अन्य कपड़ा दरवाजे में फंस जाए और ट्रेन चलने लगे, तो प्रणाली खिंचाव को पहचानकर चालक को अलर्ट देगी और आवश्यक होने पर ट्रेन को स्वत: रोकने की क्षमता रखेगी। इसका उद्देश्य दरवाजे से घिसटने जैसी दुर्घटनाओं को रोकना है। डीएमआरसी ने यह भी तय किया है कि डोर सिस्टम उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि दरवाजे से जुड़े किसी भी जोखिम को कम किया जा सके। दरवाजों की निगरानी, नियंत्रण और खराबी की पहचान लगातार इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम से होती रहेगी। इसके साथ ही चालक को दरवाजों की स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी मिलती रहेगी।
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17 ट्रेन सेट के लिए होंगे 68 कोच
रिठाला-नरेला-नाथूपुर (रेड लाइन विस्तार) कॉरिडोर के लिए डीएमआरसी 68 नए ब्रॉड गेज कोच खरीदेगी। ये कुल 17 ट्रेनसेट (प्रत्येक में चार कोच) के रूप में संचालित होंगे। कोचों की डिजाइनिंग, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग ही नहीं, बल्कि परिचालन कर्मियों का प्रशिक्षण और 15 वर्ष तक व्यापक रखरखाव भी शामिल है। नई ट्रेनें 25 केवी एसी ओवरहेड कैटेनरी प्रणाली पर चलेंगी और ऊर्जा बचत के लिए रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से लैस होंगी। इनका संचालन ग्रेड ऑफ ऑटोमेशन-2 मानक के अनुरूप होगा, जिसमें चालक मौजूद रहेगा लेकिन कई परिचालन प्रक्रियाएं स्वचालित होंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत रिठाला-नरेला-नाथूपुर (रेड लाइन विस्तार) कॉरिडोर पर चलने वाली नई मेट्रो ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए दरवाजों को बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जाएगा। डीएमआरसी ने 68 नए ब्रॉड गेज कोचों की खरीद के लिए जारी तकनीकी विनिर्देशों में स्पष्ट किया है कि ट्रेन के दरवाजों का डिजाइन इस प्रकार होगा कि दरवाजा खुला रहने पर ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकेगी।
गलत दिशा की ओर दरवाजे नहीं खुलेंगे और किसी यात्री का कपड़ा या सामान फंसने की स्थिति में ट्रेन स्वत: रुक जाएगी। ये सभी सुरक्षा प्रावधान नए रोलिंग स्टॉक के लिए अनिवार्य होंगे। नई ट्रेनों में लगाया जाने वाला डोर कंट्रोल सिस्टम केवल दरवाजा खोलने और बंद करने तक ही नहीं होगा, बल्कि यह ट्रेन संचालन से सीधे जुड़ा सुरक्षा तंत्र होगा। ट्रेन तभी चल सकेगी जब सभी दरवाजे पूरी तरह बंद और लॉक होने की पुष्टि हो जाएगी। यदि किसी भी कोच का दरवाजा सही तरीके से बंद नहीं होता, तो ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गलत दिशा में दरवाजा खुलने से रोकने की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। प्लेटफॉर्म जिस ओर होगा, उसी ओर के दरवाजे खुलेंगे। दूसरी ओर के दरवाजे तकनीकी रूप से लॉक रहेंगे, जिससे दुर्घटना की आशंका कम होगी।
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दस्तावेज में एंटी-ड्रैग तकनीक को भी अनिवार्य सुरक्षा फीचर के रूप में शामिल किया गया है। यदि किसी यात्री का दुपट्टा, साड़ी, बेल्ट या अन्य कपड़ा दरवाजे में फंस जाए और ट्रेन चलने लगे, तो प्रणाली खिंचाव को पहचानकर चालक को अलर्ट देगी और आवश्यक होने पर ट्रेन को स्वत: रोकने की क्षमता रखेगी। इसका उद्देश्य दरवाजे से घिसटने जैसी दुर्घटनाओं को रोकना है। डीएमआरसी ने यह भी तय किया है कि डोर सिस्टम उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि दरवाजे से जुड़े किसी भी जोखिम को कम किया जा सके। दरवाजों की निगरानी, नियंत्रण और खराबी की पहचान लगातार इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम से होती रहेगी। इसके साथ ही चालक को दरवाजों की स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी मिलती रहेगी।
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17 ट्रेन सेट के लिए होंगे 68 कोच
रिठाला-नरेला-नाथूपुर (रेड लाइन विस्तार) कॉरिडोर के लिए डीएमआरसी 68 नए ब्रॉड गेज कोच खरीदेगी। ये कुल 17 ट्रेनसेट (प्रत्येक में चार कोच) के रूप में संचालित होंगे। कोचों की डिजाइनिंग, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग ही नहीं, बल्कि परिचालन कर्मियों का प्रशिक्षण और 15 वर्ष तक व्यापक रखरखाव भी शामिल है। नई ट्रेनें 25 केवी एसी ओवरहेड कैटेनरी प्रणाली पर चलेंगी और ऊर्जा बचत के लिए रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से लैस होंगी। इनका संचालन ग्रेड ऑफ ऑटोमेशन-2 मानक के अनुरूप होगा, जिसमें चालक मौजूद रहेगा लेकिन कई परिचालन प्रक्रियाएं स्वचालित होंगी।