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कोरोना से जंग : राजधानी में इस बार संक्रमण हावी, कम ठीक हो रहे मरीज
Sun, 16 Jan 2022 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 16 Jan 2022 05:36 AM IST
सार
पहली से चौथी लहर तक रोजाना 60% से ज्यादा हुई रिकवरी, 31 दिसंबर से 12 जनवरी 2022 के बीच 54 फीसदी तक ही स्वस्थ हुए रोगी।
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- फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
राजधानी में कोरोना की पांचवीं लहर को ओमिक्रॉन वैरिएंट से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि अस्पतालों में रोगियों के भर्ती होने की दर 15 फीसदी से भी कम है, जबकि दैनिक मामलों में उछाल की वजह से दिल्ली चौथी लहर के बराबर भी पहुंच गई है।
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ऐसे कोरोना की दैनिक रिकवरी दर की आपस में तुलना करें तो पिछली चार लहरों की तुलना में इस बार रोजाना रिकवरी में थोड़ी कमी दर्ज की गई है। पहली से लेकर चौथी लहर तक दिल्ली में प्रतिदिन संक्रमित मिलने वाले रोगियों की तुलना में करीब 60 फीसदी से ज्यादा रिकवरी हो रही थी, लेकिन इस बार यानी पांचवीं लहर की शुरूआत में यह दर काफी कम थी, जबकि बीते दिनों दैनिक मामलों में उछाल आने के साथ रिकवरी में भी बढ़ोतरी हुई।
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आंकड़ों के जरिए इसे और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। बीते 31 दिसंबर तक दिल्ली में जब कोरोना के मामले बढ़ना शुरू हुए थे उस दौरान प्रतिदिन संक्रमित मिल रहे रोगियों के अनुपात में रिकवरी करीब 25 फीसदी हो रही थी, लेकिन 12 जनवरी आने तक यह रिकवरी दर 25 से बढ़कर 54 फीसदी तक जा पहुंची। बीते 14 जनवरी को यह भी स्थिति आई कि संक्रमित रोगियों से अधिक रिकवरी की संख्या दर्ज हुई। हालांकि, उस दौरान एक तथ्य यह भी था कि जांच में करीब 10 हजार नमूनों की कमी आई थी और उसके चलते संक्रमित रोगियों की संख्या भी कम हुई।
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पहली और चौथी लहर सबसे खतरनाक रही :मार्च 2020 से दिल्ली अब तक पांच बार कोरोना की लहर देख चुकी है। पहली और चौथी लहर सबसे अधिक जोखिम भरी रही। पहली लहर में रोजाना 60 फीसदी के आसपास रिकवरी हुई, जबकि चौथी लहर में पीक वाले दिन यानी 20 अप्रैल 2021 को नए मामलों की तुलना में 68.42 फीसदी रिकवरी हुई थी। तब एक दिन में 28395 लोग संक्रमित मिले और 19430 मरीजों को छुट्टी मिली थी।
इसी तरह पहली लहर 24 जून 2020 को आई थी जब एक दिन में 3788 लोग संक्रमित मिले थे, लेकिन 2124 रोगियों को छुट्टी मिली। दूसरी लहर का पीक 17 सिंतबर 2020 को आया जब 4432 लोग संक्रमित थे और 3587 रिकवरी हुईं।राजधानी में तीसरी लहर 11 नवंबर 2020 को आई जब 8593 लोग संक्रमित और 7264 रिकवरी हुई थी।
रिकवरी बढ़ना क्यों जरूरी?
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि कोरोना महामारी में जब भी संक्रमण दर में एक निरंतर बढ़ोतरी होती है तो उसका असर रिकवरी पर पड़ता है। फिर चाहे वह जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर ही स्थिति क्यों न हो? रिकवरी बढ़ना इसलिए जरूरी है क्योंकि नए मरीज बढ़ने से सक्रिय मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। यह एक तरीके से सिस्टम पर बोझ जैसे होते हैं, जो किसी भी वक्त स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डाल सकते हैं। जैसे अभी दिल्ली में 94 हजार से ज्यादा सक्रिय मामले हैं। भले ही आज या कल कोरोना की गति कम हो जाए, लेकिन इन सक्रिय मरीजों को 100 तक आने में करीब एक से दो महीने का इंतजार हमें करना पड़ सकता है।