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सीएनजी ब्लास्ट: इकलौते कमाने वाले मनीष और सनी की मौत से परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, बेसहारा हुए मासूम

Thu, 20 Aug 2026 10:27 PM IST
Digvijay Singh राजीव कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
राजीव कुमार, अमर उजाला, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Thu, 20 Aug 2026 10:27 PM IST
सार

सीएनजी पंप पर बुधवार को हुए हुए भीषण विस्फोट में सिर्फ मनीष और सनी की मृत्यु नहीं हुई, बल्कि उन दो परिवारों की उम्मीदों ने भी दम तोड़ दिया, जिनका ये एकमात्र सहारा थे। 

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CNG Blast Families devastated by deaths of sole breadwinners Manish and Sunny  in delhi
सीएनजी पंप पर धमाका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीएनजी पंप पर बुधवार को हुए हुए भीषण विस्फोट में सिर्फ मनीष और सनी की मृत्यु नहीं हुई, बल्कि उन दो परिवारों की उम्मीदों ने भी दम तोड़ दिया, जिनका ये एकमात्र सहारा थे। एक तरफ मनीष जिसकी शादी के बाद दो साल बाद एक बेटे ने जन्म लिया था, जो अभी सिर्फ पांच माह का ही हुआ है, उसके सिर से पिता का साया छिन गया। वहीं, दूसरी तरफ सनी जिसके ऊपर उसके बड़े भाई की मृत्यु के बाद उनके दो बच्चों की जिम्मेदारियां थीं, अब वो बच्चे भी पूरी तरह से बेसहारा हो गए। घर में रह गई तो वो बेचारी मां जिसने पहले पति खोया, और फिर भाई जैसे देवर को भी खो दिया। वहीं, मनीष की पत्नी और उनका मासूम बच्चा जिसे पिता की शक्ल भी अभी याद नहीं हुई थी, वो चेहरा अब तस्वीरों में कैद हो गया है।

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मनीष अपने माता-पिता, पत्नी और महज पांच माह के बच्चे के साथ बाबा हरिदास कॉलोनी में रहता था। दसवीं कक्षा तक पढ़ा मनीष सीएनजी पंप पर पिछले दो साल से रिफिलिंग का काम कर रहा था। उनके परिचित विजय ने बताया कि उसके पिता इन्वर्टर की बैटरी बनाने वाली फैक्टरी में काम करते हैं, लेकिन वह बीमार रहते हैं। ऐसे में 12 से 15 हजार की कमाई में ही वह जिंदगी की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करता था। परिवार में वही इकलौता कमाने वाला था। पत्नी और मासूम बच्चे की जरूरतों के साथ-साथ वह अपने बीमार पिता संजय की भी देखभाल करता था। 
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ऐसे में मनीष उनके लिए बेटे से बढ़कर सहारा बन गए थे। परिवार को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिस बेटे और पति के भरोसे उनका घर चल रहा है, वह इतनी जल्दी उनसे हमेशा के लिए दूर हो जाएगा। पांच माह का मासूम अभी ठीक से अपने पिता को पहचानना भी नहीं सीख पाया था। अब वह पिता की उंगली पकड़कर चलना, उनकी गोद में खेलना और उन्हें पुकारना कभी नहीं सीख पाएगा। मनीष की मौत ने परिवार की आर्थिक मुश्किलों को भी कई गुना बढ़ा दिया है। उस समय लोग अपने आंसू को रोक नहीं पाए, जब पिता ने जवान बेटे को मुखाग्नि दी।
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वहीं निजामपुर निवासी सनी के परिवार ने कुछ साल पहले ऐसा दर्द झेला, जिसकी टीस आज भी कम नहीं हुई है। वर्ष 2021 में सड़क हादसे में सनी के भाई प्रीतम की मौत हो गई थी। हादसे ने परिवार से उसका सहारा छीन लिया। पीछे रह गईं उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चे। उनके चचेरे भाई बलराज सिंह ने बताया कि भाई के जाने के बाद सनी ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ भाभी और दोनों बच्चों की देखभाल का भी बीड़ा उठा लिया। प्रीतम की आठ साल की बेटी तीसरी, जबकि पांच साल का बेटा नर्सरी में पढ़ता है। दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है। 


अब उनकी जिम्मेदारी उठाने वाले सनी की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं है। सनी के पिता किसान हैं और खेती के सहारे परिवार का गुजर-बसर होता है। सीमित आमदनी के बीच बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और दूसरी जरूरतें पूरी करना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में इतनी बड़ी घटना हो गई और एक ही गांव के दो लोगों की मौत हो गई, लेकिन सरकार या फिर किसी पार्टी की ओर से उनके दुख में शामिल होने के लिए कोई नहीं आया।

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