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दिल्ली जिमखाना क्लब मामला: केंद्र ने हाई कोर्ट में कहा-बेदखली नोटिस पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते
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दिल्ली जिमखाना क्लब मामला:
केंद्र ने हाई कोर्ट में कहा-बेदखली नोटिस पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते
-इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय कर दी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब को जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते। सरकार का कहना है कि कानून में ऐसी कार्रवाई पर सिविल कोर्ट के दखल की अनुमति नहीं है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की अदालत में हुई। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) एक्ट, 1971 के तहत बेदखली से जुड़े मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सीमित है। सरकार के अनुसार, इस कानून की धारा 15 किसी भी अदालत को बेदखली की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने या एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई पर रोक लगाने से रोकती है।
सरकार की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल (सीजीएससी) आशीष दीक्षित ने जवाब दाखिल किया। इसमें कहा गया कि मौजूदा याचिकाओं में एस्टेट ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस पर आगे की कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है, जो कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है। यह मामला दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर अर्जियों से जुड़ा है। दोनों ने 29 जून को जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी। यह नोटिस केंद्र सरकार की ओर से क्लब परिसर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद जारी किया गया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय कर दी।
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केंद्र ने हाई कोर्ट में कहा-बेदखली नोटिस पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते
-इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय कर दी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब को जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते। सरकार का कहना है कि कानून में ऐसी कार्रवाई पर सिविल कोर्ट के दखल की अनुमति नहीं है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन की अदालत में हुई। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) एक्ट, 1971 के तहत बेदखली से जुड़े मामलों में सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र सीमित है। सरकार के अनुसार, इस कानून की धारा 15 किसी भी अदालत को बेदखली की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने या एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई पर रोक लगाने से रोकती है।
सरकार की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल (सीजीएससी) आशीष दीक्षित ने जवाब दाखिल किया। इसमें कहा गया कि मौजूदा याचिकाओं में एस्टेट ऑफिसर को कारण बताओ नोटिस पर आगे की कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है, जो कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है। यह मामला दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर अर्जियों से जुड़ा है। दोनों ने 29 जून को जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी। यह नोटिस केंद्र सरकार की ओर से क्लब परिसर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद जारी किया गया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय कर दी।
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