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दिल्ली : थाइलैंड ने भी की भारत की मदद, ऑक्सीजन सिलिंडर सहित भेजे कई मेडिकल उपकरण
Sat, 08 May 2021 02:40 PM IST
सुशील कुमार कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Sat, 08 May 2021 02:40 PM IST
सार
थाईलैंड से शनिवार को 200 ऑक्सीजन सिलिंडर और 10 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भारत आए। सिर्फ इतना ही नहीं थाईलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय ने भी मदद की है।
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थाइलैंड ने ऑक्सीजन सिलिंडर सहित भेजे कई मेडिकल उपकरण।
- फोटो : ट्विटर ANI
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विस्तार
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कहर जारी है और कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। रोजाना चार लाख से अधिक मामले और चार हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। महामारी के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। ऑक्सीजन और मेडिकल उपकरण की कमी के चलते संक्रमितों की जान जा रही है।
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इस संकट से निपटने के लिए कई देश भारत की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसी क्रम में थाइलैंड भी भारत की मदद के लिए सामने आया है। थाईलैंड से शनिवार को 200 ऑक्सीजन सिलिंडर और 10 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भारत आए। सिर्फ इतना ही नहीं थाईलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय ने भी मदद की है। इन लोगों ने भारत में 100 ऑक्सीजन सिलिंडर और 60 कंसट्रेटर देश की राजधानी दिल्ली में भेजे हैं।
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200 oxygen cylinders & 10 oxygen concentrators sent by Thailand government and another 100 oxygen cylinders & 60 oxygen concentrators donated by Indian community in Thailand arrive in Delhi. pic.twitter.com/hogbacCulT
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 8, 2021
वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि कोरोना की दूसरी लहर की पीक मई के मध्य से अंत के बीच सामने आ सकती है। साथ ही ये भी अनुमान है कि कोरोना की तीसरी लहर अक्तूबर-नवंबर के बीच आ सकती है और यह अब तक की सभी लहर से ज्यादा घातक हो सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अनुमान है और इसके पूरी तरह सही होने की कोई संभावना नहीं है। यह लोगों के हाथ में है, वे चाहें तो कोरोना की तीसरी लहर को आने से रोक सकते हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में माइक्रोबायोलोजी की सीनियर वैज्ञानिक डॉक्टर निवेदिता गुप्ता ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना का सर्वोच्च समय अपने आप में एक मिथ है। इसके बारे में पहले से कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यह पूरी तरह लोगों के सामाजिक व्यवहार पर निर्भर करता है। अगर आज ही देश भर के लोग आपस में मिलना-जुलना बिलकुल बंद कर दें, तो 15 दिनों के अंदर ही कोरोना संक्रमण चेन टूट सकती है और इस तरह इसकी दूसरी लहर की पीक अभी ही सामने आ जाएगी।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) में माइक्रोबायोलोजी की सीनियर वैज्ञानिक डॉक्टर निवेदिता गुप्ता ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना का सर्वोच्च समय अपने आप में एक मिथ है। इसके बारे में पहले से कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यह पूरी तरह लोगों के सामाजिक व्यवहार पर निर्भर करता है। अगर आज ही देश भर के लोग आपस में मिलना-जुलना बिलकुल बंद कर दें, तो 15 दिनों के अंदर ही कोरोना संक्रमण चेन टूट सकती है और इस तरह इसकी दूसरी लहर की पीक अभी ही सामने आ जाएगी।