यौन उत्पीड़न मामले में छात्रा को राहत, दोबारा JNU में कर सकेगी पढ़ाई
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जेएनयू कैंपस के हॉस्टल में वैदिक रिवाज से जन्मदिन मनाने के दौरान वार्डन द्वारा छात्रा का हाथ पकड़ने के मामले में जीएस कैश कमेटी के फैसले को एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने बदल दिया है।
कमेटी के फैसले के चलते छात्रा को बर्खास्त कर दिया था, लेकिन अब काउंसिल ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए कमेटी के फैसले को बदल दिया है। वहीं, अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष द्वारा जातिसूचक शब्द का प्रयोग करने के मामले के लिए जांच कमेटी भी गठित कर दी गई है।
विश्वविद्यालय में मंगलवार को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक आयोजित हुई। काउंसिल ने हिमानी को दोबारा विश्वविद्यालय में पढ़ाने करने की अनुमति का प्रस्ताव पास कर दिया है। वहीं, इकोनोमिक्स में पीएचडी की छात्रा जयति घोष पर जातिसूचक शब्द का प्रयोग करने के मामले के लिए काउंसिल ने कमेटी गठित की है।
छात्रा की पढ़ाई को हुआ है नुकसान
इसके अलावा जयति घोष की पढ़ाई को जो नुकसान हुआ है, उसमें विश्वविद्यालय मदद भी करेगा। काउंसिल ने प्रो. अश्विनी महापात्रा के तीन साल पुराने केस का हवाला देकर चेयरमैन पद से हटाने के मामले में संज्ञान लेते हुए प्रस्ताव को रद्द कर दिया है।
इसके साथ ही काउंसिल अब जीएस कैश कमेटी से जवाब मांगेगी कि नियमों के तहत काम क्यों नहीं किया जा रहा है। काउंसिल सदस्यों के मुताबिक, तीन महीने के केस को ही काउंसिल में रखा जा सकता है।
लाइब्रेरी का नाम डॉ. भीम राव अंबेडकर हुआ
सेंट्रल लाइब्रेरी का नाम अब बदल गया है। काउंसिल ने सेंट्रल लाइब्रेरी का नाम बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर करने पर मोहर लगा दी है। लाइब्रेरी में बाबा साहिब की मूर्ति भी लगाई जाएगी।