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दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह पड़ोसी राज्यों की पराली : आप
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्यों में जलाई जाने वाली पराली को मुख्य वजह बताया है। दिल्ली में वायु प्रदूषण का 45 प्रतिशत हिस्सा पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलाई जाने वाली पराली है। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार इस इन राज्यों में 35 मिलियन टन पराली जलने की उम्मीद है। पार्टी ने पड़ोसी राज्यों को आगाह किया है कि पराली जलाने पर रोक लगाएं। पार्टी कहा कि पड़ोसी राज्यों ने गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांध ली है और सच से मुकर रहे है कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए वही जिम्मेवार हैं।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि पूरे देश में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्री है, जिन्होंने प्रदूषण के खिलाफ गंभीरता दिखाई। ईमानदारी के साथ लड़ने की इच्छा दिखाई है। वहीं, पंजाब व हरियाणा की सरकार उदासीनता बरत रही है। पराली भी जलने से रोकने में कदम नहीं उठा रही।
चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले साल के मुकाबले अक्तूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के मामलों में पंजाब में 9 गुना और हरियाणा में 3 गुना वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार भी सिर्फ वायु प्रदूषण से निपटने की बात करती है।
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उन्होंने पूछा कि केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणा का क्या हुआ जिसमें हवा को स्वच्छ करने के लिए 4,400 करोड़ रुपये खर्च करने की बात थी। अाखिर कहां गया पैसा। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ एक्शन प्लान जारी किया है। ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया गया है। वायु प्रदूषण से दिल्ली वालों के फेफड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दिल्ली एक गैस चैंबर में तब्दील होती जा रही है।
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि पूरे देश में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्री है, जिन्होंने प्रदूषण के खिलाफ गंभीरता दिखाई। ईमानदारी के साथ लड़ने की इच्छा दिखाई है। वहीं, पंजाब व हरियाणा की सरकार उदासीनता बरत रही है। पराली भी जलने से रोकने में कदम नहीं उठा रही।
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चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले साल के मुकाबले अक्तूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के मामलों में पंजाब में 9 गुना और हरियाणा में 3 गुना वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार भी सिर्फ वायु प्रदूषण से निपटने की बात करती है।
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उन्होंने पूछा कि केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणा का क्या हुआ जिसमें हवा को स्वच्छ करने के लिए 4,400 करोड़ रुपये खर्च करने की बात थी। अाखिर कहां गया पैसा। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ एक्शन प्लान जारी किया है। ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया गया है। वायु प्रदूषण से दिल्ली वालों के फेफड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दिल्ली एक गैस चैंबर में तब्दील होती जा रही है।