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कारतूसों की तस्करी में गन हाउस का मालिक समेत छह गिरफ्तार

Fri, 19 Feb 2021 12:59 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2021 12:59 AM IST
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Six including gun house owner arrested for smuggling cartridges
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कारतूसों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर गन हाउस के मालिक समेत छह को गिरफ्तार किया है। ये गन हाउस से कारतूस लेकर दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों के बदमाशों को अवैध रूप से सप्लाई करते थे। पुलिस ने इनके पास से 4500 कारतूस, दो कारें और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
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स्पेशल सेल डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, पुलिस टीम ने सूचना के बाद आउटर रिंग रोड स्थित मुकुंदपुर फ्लाईओवर पर घेराबंदी कर करनाल के गांव रसूलपुर निवासी रमेश कुमार और यूपी के इटावा की न्यू कॉलोनी निवासी दीपांशु मिश्रा को 14 फरवरी को गिरफ्तार किया था। रमेश दीपांशु को कारतूस देने आया था। इसके बाद पुलिस ने जयपुर में दबिश देकर मुख्य सप्लायर रेवाड़ी के सेक्टर-तीन निवासी अमित राव को 16 फरवरी को दबोच लिया। अमित ने दीपांशु समेत कई लोगों को अवैध रूप से कारतूस सप्लाई करने की बात स्वीकार की।
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रमेश से पूछताछ के बाद पानीपत के कलंदर चौक निवासी इकराम को पानीपत से 17 फरवरी को गिरफ्तार किया। इसके बाद इकराम के भाई मुजफ्फरनगर के शाहबुदीनपुर के नयाजूपूरा निवासी अकरम को करनाल के शामली रोड से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पंचकूला से सहारनपुर के नासरूलगढ़ निवासी मनोज कुमार को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी रमेश से अवैध कारतूसों की खेप लेते थे।
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रिकॉर्ड बुक में नहीं करता था एंट्री
रमेश कुमार अंबाला गन हाउस के मालिक अमित राव के यहां दस हजार की तनख्वाह पर नौकरी करता था। तनख्वाह कम होने के कारण उसने अमित राव से कहा कि अगर वह गैर बाजार में कारतूस बेचेंगे तो जल्दी ज्यादा कमाई कर सकेंगे। अमित गोला-बारूद बनाने वाली कंपनी से कारतूस खरीदता था और उनकी रिकॉर्ड बुक में एंट्री नहीं करता था। इसके बाद महंगे दाम पर दीपांशु व अन्य लोगों को कारतूस बेचते। एमबीए करने वाला दीपांशु नोएडा में सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। इसके पिता का इटावा में गन हाउस था। पिता की मौत के बाद इसने 2015 में गन हाउस बंद कर दिया था। ये रमेश से कारतूस लेकर तस्करी करने लगा। दीपांशु एक कारतूस 125 रुपये में लेकर 200 से 250 रुपये में आगे बेचता था।

आर्म्स लाइसेंस की आड़ में तस्करी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमबीए करने वाला अमित होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी कर चुका है। इसके मामा का अंबाला गन हाउस था। इसके बाद इसे गन हाउस का लाइसेंस मिल गया। यह पुणे स्थित कंपनी से 80 रुपये में कारतूस लेता था। रिकॉर्ड बुक में एंट्री नहीं करता था। ये एक कारतूस को आगे 125 रुपये में बेचता था। मुजफ्फरनगर निवासी इकराम व अकरम दोनों सगे भाई हैं। ये गन रिपेयरिंग का काम करते थे। रमेश के संपर्क में आने से कारतूसों की तस्करी करने लगे। मनोज कुमार के पास आर्म्स लाइसेंस है। इसकी आड़ में ये कारतूसों की तस्करी करता था।
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