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एक बैठक टलने से कोई फर्क नहीं पड़ता, जिस रास्ते से कानून आए थे, वैसे ही रद्द हो : राकेश टिकैत
Tue, 19 Jan 2021 08:12 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 19 Jan 2021 08:12 PM IST
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राकेश टिकैत
- फोटो : पीटीआई
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कृषि कानूनों को लेकर किसान और सरकार के बीच गतिरोध जारी है। अबतक दोनों के बीच 9वें दौरे की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 10वें दौरे की वार्ता 19 जनवरी को होने वाली थी, लेकिन अब ये वार्ता 20 जनवरी को होगी। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि एक दिन की देरी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है।
सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि जबतक कानून रद्द नहीं हो जाता, तबतक वे यहीं जमे रहेंगे। कृषि कानूनों पर आज होने वाली सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की बैठक के बारे में राकेश टिकैत से जब पूछा तो उन्होंने कहा कि किसान सुप्रीम कोर्ट में नहीं गए हैं और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कमेटी की पहली बैठक के बारे में हम कुछ नहीं जानते, हम बैठक में नहीं जा रहे हैं। आंदोलन से कोई भी अदालत में नहीं आया। सरकार अध्यादेश के माध्यम से इन कानूनों को लाई और बाद में उन्हें सदन में पेश किया गया। इन कानूनों को ऐसे ही रद्द किया जाना चाहिए. जिस रास्ते से कानून आए थे, उसी रास्ते से रद्द हो।
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वहीं, किसानों ने भी टिकैत की बात का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक कानून रद्द नहीं किए जाते, तब तक वे दिल्ली की सीमाओं को नहीं छोड़ेंगे।
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सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि जबतक कानून रद्द नहीं हो जाता, तबतक वे यहीं जमे रहेंगे। कृषि कानूनों पर आज होने वाली सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की बैठक के बारे में राकेश टिकैत से जब पूछा तो उन्होंने कहा कि किसान सुप्रीम कोर्ट में नहीं गए हैं और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कमेटी की पहली बैठक के बारे में हम कुछ नहीं जानते, हम बैठक में नहीं जा रहे हैं। आंदोलन से कोई भी अदालत में नहीं आया। सरकार अध्यादेश के माध्यम से इन कानूनों को लाई और बाद में उन्हें सदन में पेश किया गया। इन कानूनों को ऐसे ही रद्द किया जाना चाहिए. जिस रास्ते से कानून आए थे, उसी रास्ते से रद्द हो।
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We don't know, we're not going (to first meeting of SC-formed committee). Nobody from the agitation approached Court. Govt brought Bill through Ordinance, it was tabled in the House. It'll go back the same route it came from: Rakesh Tikait, spox, Bharatiya Kisan Union#FarmLaws pic.twitter.com/EW0sqf7GWF
— ANI (@ANI) January 19, 2021
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वहीं, किसानों ने भी टिकैत की बात का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक कानून रद्द नहीं किए जाते, तब तक वे दिल्ली की सीमाओं को नहीं छोड़ेंगे।