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दिल्ली हाईकोर्ट: एलोपैथी के खिलाफ गलत सूचना फैलाने के आरोप में बाबा रामदेव के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करना जरूरी
Mon, 25 Oct 2021 07:11 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 25 Oct 2021 07:11 PM IST
सार
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने मामले कि सुनवाई के दौरान कहा कि वर्तमान स्तर पर केवल यह देखने की जरूरत है कि क्या आरोपों पर किसी मामले पर विचार किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि आरोप सही या शायद गलत हो सकते हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि योग गुरु रामदेव के खिलाफ कई डॉक्टरों की एसोसिएशन द्वारा कोविड-19 महामारी के बीच एलोपैथी के खिलाफ कथित रूप से गलत सूचना फैलाने के लिए दायर याचिका पर प्रथम दृष्टया विचार किया जाना जरूरी है। इसे आरंभिक स्तर पर बाहर नहीं फेंका जा सकता।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने मामले कि सुनवाई के दौरान कहा कि वर्तमान स्तर पर केवल यह देखने की जरूरत है कि क्या आरोपों पर किसी मामले पर विचार किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि आरोप सही या शायद गलत हो सकते हैं। दूसरा पक्ष कह सकता है कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही, इस तथ्य पर गौर करने की जरूरत है।
अदालत ने इस मामले में रामदेव से जवाब मांगा था व उन्होंने याचिका को विचारयोग्य न रखने का तर्क रखा था। अदालत ने कहा कि उनकी नजर में प्रथम दृष्टया याचिका में लगाए गए आरोपों की प्रकृति व गुणदोष पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अक्तूबर तय करते हुए बाबा रामदेव के वकील को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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ऋषिकेश, पटना और भुवनेश्वर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के तीन रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के साथ-साथ रेजिडेंट डॉक्टरों के एसोसिएशन, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, यूनियन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब (यूआरडीपी), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, मेरठ और तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, हैदराबाद ने इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि बाबा रामदेव जनता को एलोपैथी के संबंध में गुमराह और गलत तरीके से पेश कर रहे हैं कि कोविड-19 से संक्रमित कई लोगों की मौतों के लिए एलोपैथी जिम्मेदार है और यह संकेत दे रहा है कि एलोपैथिक डॉक्टर मरीजों की मौतों का कारण बन रहे हैं। याची की और से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि एक महामारी के बीच, योग गुरु ने कोरोनिल पर अप्रमाणित दावे किए कि वह कोविड -19 के लिए एक इलाज है, जबकि यह इम्यूनो बूस्टर है। उनका दावा, दवा को दिए गए लाइसेंस के विपरीत है।
याचिका में एसोसिएशनों ने कहा कि योग गुरु जो कि अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, न केवल एलोपैथिक उपचार बल्कि कोविड -19 टीकों की सुरक्षा और प्रभावकारिता से संबंधित आम जनता के मन में संदेह बो रहे है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गलत सूचना अभियान रामदेव द्वारा बेचे गए उत्पाद की बिक्री को आगे बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन और विपणन रणनीति के अलावा कुछ नहीं था, जिसमें कोरोनिल भी शामिल है।
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न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने मामले कि सुनवाई के दौरान कहा कि वर्तमान स्तर पर केवल यह देखने की जरूरत है कि क्या आरोपों पर किसी मामले पर विचार किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि आरोप सही या शायद गलत हो सकते हैं। दूसरा पक्ष कह सकता है कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही, इस तथ्य पर गौर करने की जरूरत है।
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अदालत ने इस मामले में रामदेव से जवाब मांगा था व उन्होंने याचिका को विचारयोग्य न रखने का तर्क रखा था। अदालत ने कहा कि उनकी नजर में प्रथम दृष्टया याचिका में लगाए गए आरोपों की प्रकृति व गुणदोष पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अक्तूबर तय करते हुए बाबा रामदेव के वकील को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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ऋषिकेश, पटना और भुवनेश्वर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के तीन रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के साथ-साथ रेजिडेंट डॉक्टरों के एसोसिएशन, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, यूनियन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब (यूआरडीपी), रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, मेरठ और तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, हैदराबाद ने इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि बाबा रामदेव जनता को एलोपैथी के संबंध में गुमराह और गलत तरीके से पेश कर रहे हैं कि कोविड-19 से संक्रमित कई लोगों की मौतों के लिए एलोपैथी जिम्मेदार है और यह संकेत दे रहा है कि एलोपैथिक डॉक्टर मरीजों की मौतों का कारण बन रहे हैं। याची की और से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि एक महामारी के बीच, योग गुरु ने कोरोनिल पर अप्रमाणित दावे किए कि वह कोविड -19 के लिए एक इलाज है, जबकि यह इम्यूनो बूस्टर है। उनका दावा, दवा को दिए गए लाइसेंस के विपरीत है।
याचिका में एसोसिएशनों ने कहा कि योग गुरु जो कि अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, न केवल एलोपैथिक उपचार बल्कि कोविड -19 टीकों की सुरक्षा और प्रभावकारिता से संबंधित आम जनता के मन में संदेह बो रहे है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गलत सूचना अभियान रामदेव द्वारा बेचे गए उत्पाद की बिक्री को आगे बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन और विपणन रणनीति के अलावा कुछ नहीं था, जिसमें कोरोनिल भी शामिल है।