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आशियाना बचाने: जंतर-मंतर पहुंचे खोरी गांव के लोग, प्रधानमंत्री कार्यालय का घेराव करने की थी तैयारी

Wed, 07 Jul 2021 01:52 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 07 Jul 2021 01:52 AM IST
सार

खोरी गांव के लोग अपना आशियाना बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दया की भीख मांग रहे थे। अपने बच्चों की दुहाई देकर प्रधानमंत्री को याद दिला रहे थे कि उन्होंने नारा दिया था, जहां झुग्गी, वहां मकान बनाएंगे। 

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people of khori village reached jantar mantar to save their house from being demolished
जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते खोरी गांव के लोग - फोटो : amar ujala

विस्तार

अपने घर को टूटने से बचाने के लिए खोरी गांव के लोग मंगलवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे। करीब एक हजार लोग प्रधानमंत्री कार्यालय घेरने की नीयत से यहां पर जुटे थे। जंतर-मंतर आए लोगों के चेहरे पर डर और निराशा का भाव साफ तौर पर देखा जा सकता था। इन लोगों ने कहा कि उनके पास अपना घर बचाने के लिए प्रधानमंत्री आवास घेरने और संसद का घेराव के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। पुलिस ने इन्हें संसद मार्ग पर रोक दिया था। भारी संख्या में तैनात पुलिस बलों ने संसद जाने के रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया था। 

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खोरी गांव के लोग अपना आशियाना बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दया की भीख मांग रहे थे। अपने बच्चों की दुहाई देकर प्रधानमंत्री को याद दिला रहे थे कि उन्होंने नारा दिया था, जहां झुग्गी, वहां मकान बनाएंगे। सीएम मनोहर लाल खट्टर से खफा प्रदर्शनकारी उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। अखिल भारतीय परिसंघ प्रमुख व कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज भी खोरी गांव के लोगों के साथ जंतर-मंतर पर मौजूद थे। 
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उन्होंने मनोहर लाल खट्टर की तरफ इंगित करते हुए कहा कि खोरी वासियों को विस्थापित करने से पहले उनके पूनर्वास की व्यवस्था हरियाणा सरकार को करानी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। लोगों ने खून पसीने की कमाई से घर बनाया है। लोगों का पुनर्वास कराए बिना अगर किसी का घर तोड़ा गया तो प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। 
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सामाजिक कार्यकर्ता मीनू वर्मा ने कहा कि करोना महामारी की तीसरी लहर आने की प्रबल संभावना है। इस वक्त औरतों, बच्चों को बेघर करना अमानवीय है। अगर बिजली और पानी का कनेक्शन नहीं जुड़ा तो लोग प्यास से मर जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार अगर नहीं मानी तो तीन दिन बाद फिर जंतर-मंतर का घेराव किया जाएगा।

खोरी निवासी रूपेश सिंह ने बताया कि वह प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने के लिए आए हैं। यह उनकी जिंदगी और मौत का सवाल है। सरकार ही उनको बचा सकती है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निरस्त कराए। सुप्रीम कोर्ट ने 7 जून को खोरी गांव के करीब 10 हजार मकानों को 6 सप्ताह के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है। अनिल पासवान ने बताया कि खोरी में करीब तीन दशक से लाखों लोग रहते हैं। 


संजय राज ने बताया कि खोरी गांव में सदियों से राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गौशाला, कब्रिस्तान, संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा, करीब 20 मंदिर, 10 मस्जिद, 4 चर्च, 1 गुरुद्वारा है। यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, छत्तीसगढ, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु व अन्य राज्यों के के प्रवासी मजदूर 170 एकड जमीन पर बसर गुजर कर रहे हैं। संजय चतुर्वेदी ने बताया कि अपना घर तोड़ने की सूचना मिलने से लोग सहमे हैं, कई लोगों ने अत्महत्या भी कर ली है। पिछले 15 दिनों से उनकी बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया है। 

खोरी गांव के लोग अपना आशियाना बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दया की भीख मांग रहे थे। अपने बच्चों की दुहाई देकर प्रधानमंत्री को याद दिला रहे थे कि उन्होंने नारा दिया था, जहां झुग्गी, वहां मकान बनाएंगे।
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