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Delhi : घटती जा रही है पीसीआर वैन संख्या, चर्चा है कि अधिकारियों के निजी कामों में लगी रहती हैं सरकारी गाड़िया

Fri, 06 Jan 2023 02:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Jan 2023 02:12 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस में अब यह चर्चा जोरों पर है कि पीसीआर वैन अधिकारियों के प्राइवेट काम में लगी रहती हैं और अफसरों का सामान ढोती हैं। पीसीआर वैन की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

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PCR van number is decreasing
delhi pcr

विस्तार

दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन की छवि धूमिल होती जा रही है। दिल्ली पुलिस में अब यह चर्चा जोरों पर है कि पीसीआर वैन अधिकारियों के प्राइवेट काम में लगी रहती हैं और अफसरों का सामान ढोती हैं। पीसीआर वैन की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

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दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शुरू में ये बात सामने आई कि पुलिस घटनास्थल पर समय से नहीं पहुंच पाती। इसे देखते हुए खोसला आयोग की रिपोर्ट पर पीसीआर को थानों से अलग कर कर दिया और 1968 में पीसीआर का गठन किया गया। उद्देश्य यह था कि घटनास्थल पर थाना पुलिस से पहले पीसीआर पहुंच जाए। दिल्ली में 1978 में कमिश्नरी सिस्टम शुरू हुआ। 1982 में दिल्ली में हुए एशियाड गेम्स को देखते हुए पीसीआर सिस्टम को और मजबूत किया गया। पीसीआर की और गाडियां मंगाईं गईं. नया सिस्टम लगा और पीसीआर कंट्रोल रूम को आईटीओ पुलिस मुख्यालय में शिफ्ट किया गया। 
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1984 के जब दंगे हुए तो उस समय दिल्ली में केवल 36 पीसीआर वैन थीं। सरकार ने दिल्ली में और ज्यादा पीसीआर बढ़ाने का फैसला किया और 1987 आते-आते इनकी संख्या 100 कर दी गई। उसके बाद दिल्ली की आबादी और अपराध के देखते हुए पीसीआर वैन की संख्या बढ़ाई जाती रही।
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पीसीआर में डीसीपी से लेकर विशेष पुलिस आयुक्त तक की तैनाती की गई। 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स के समय 600 कर दी गई। पूर्व पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने 400 पीसीआर बढ़वाईं और पीसीआर 1000 हो गई। बाद में पीसीआर कर्मी तीन शिफ्ट में काम करने लगे। जीपीएस से लैस हर एक पीसीआर वैन को स्मार्ट आईपैड दिया गया, जो कि पीसीआर मुख्यालय से कनेक्ट था। इसमें ऑटोमेटिक तरीके से कॉलर की लोकेशन भी आती है। 


फरवरी, 2020 में 842 पीसीआर वैन थी। पीसीआर वैन की उस समय तारीफ होने लगी जब महिलाओं को लेबर पैन होने पर 10 पीसीआर तक पहुंचने लगीं। कोविड काल में पीसीआर ने खूब वाहवाही लूटी। पीसीआर को दिल्ली लाइफ लाइन कहा जाने लगा। पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना ने इस लाइफलाइन केा 2021 में खत्म कर दिया। पीसीआर में काम करने वाले 6000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों और 790 पीसीआर वैन को थाने के अधीन कर दिया गया। इससे थानाध्यक्षों पर भी बोझ बढ़ गया।

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