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Hindi News ›   Delhi ›   Nursery Admission admission is deteriorating due to marks of former students and siblings most of schools gave highest marks 

नर्सरी दाखिला: पूर्व छात्र व भाई-बहन के अंकों से बिगड़ रहा दाखिले का गणित, अधिकतर स्कूलों ने इन्हीं को दिए सबसे ज्यादा अंक

Mon, 20 Dec 2021 10:24 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Mon, 20 Dec 2021 10:24 PM IST
सार

राजधानी में ऐसे कई नामी स्कूल हैं जो उन बच्चों को प्राथमिकता दे रहे, जिनके माता-पिता (एल्युमिनी) उसी स्कूल में पढ़ चुके हैं या फिर उनका पहला बच्चा (सिबलिंग) उसी स्कूल में पढ़ रहा है।

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Nursery Admission admission is deteriorating due to marks of former students and siblings most of schools gave highest marks 
nursery admission - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के निजी स्कूलों मे नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए रेस जारी है। इस रेस के लिए स्कूलों की ओर से जारी सिबलिंग (भाई-बहन) व एल्युमिनी (पूर्व छात्र) जैसे मानक कई बच्चों के दाखिले की गणना को बिगाड़ रहे हैं। अधिकतर निजी स्कूलों ने नेबरहुड (पड़ोस) के बाद इन्हीं दो मानकों को सबसे ज्यादा अंक दिए हैं। इन मानकों से उन अभिभावकों को परेशानी हो रही है जो कि अपने पहले बच्चे का दाखिला कराना चाहते हैं या फिर उस स्कूल में स्वयं नहीं पढ़े हैं।

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राजधानी में ऐसे कई नामी स्कूल हैं जो उन बच्चों को प्राथमिकता दे रहे, जिनके माता-पिता (एल्युमिनी) उसी स्कूल में पढ़ चुके हैं या फिर उनका पहला बच्चा (सिबलिंग) उसी स्कूल में पढ़ रहा है। अब जो अभिभावक उस स्कूल में नहीं पढ़े या फिर उनका पहला बच्चा भी नहीं पढ़ रहा तो सीधे-सीधे उन्हें इन मानकों के अंकों का नुकसान हो रहा है। जनरल राज स्कूल में सिबलिंग के लिए 20 अंक, एल्युमिनी के लिए 15 अंक, मॉर्डन परफेक्ट पब्लिक स्कूल में सिंबलिंग के लिए 10, एल्युमिनी के लिए 10 अंक, जीडी सालवान पब्लिक स्कूल में एल्युमिनी के लिए 10, सिबलिंग के लिए 10 अंक दिए जा रहे हैं।
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ऐसे ही कई अन्य स्कूल एल्युमिनी के लिए 15-20 और सिबलिंग के लिए 10-20 अंक तक दे रहे हैं। अब जो अभिभावक इन स्कूल में नहीं पढ़े या जिनका पहला बच्चा उस स्कूल में नहीं पढ़ रहा है तो उनके अंकों का गणित दाखिले के लिए नहीं बन रहा। उन्हें सिर्फ सिंगल चाइल्ड और नेबरहुड (पड़ोस) के ही अंक मिल रहे हैं। अभिभावक रुचिका गोयल कहती हैं कि इन मानकों के कारण उन्हें अपने बच्चे का दाखिला होना मुश्किल लग रहा है। 
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वह कहती हैं कि यह मानक गलत हैं क्योंकि इससे तो ऐसा हो रहा है कि जैसे अभिनेता का बच्चा अभिनेता बनेगा, डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, उसी तरह से स्कूल उसी बच्चे को दाखिले के अंक देंगे जिनके माता-पिता या बच्चे वहां पढ़े होंगे। अभिभावकों की शिकायत यह भी है कि इन दो मानकों के कारण वह नामी स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने का सपना ही नहीं देख सकते।

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