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दिल्ली विश्वविद्यालय: एनईपी और चार वर्षीय पाठ्यक्रम पर लगी मोहर, कार्यकारी परिषद की बैठक में नई शिक्षा नीति पास
Tue, 31 Aug 2021 11:39 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 31 Aug 2021 11:39 PM IST
सार
ईसी सदस्य और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार आपति के बाद भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन को पास कर दिया गया। चार वर्षीय स्नातक प्रोग्राम के गुण बिलकुल भी स्पष्ठ नहीं है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय
- फोटो : DU Website
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विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय मंगलवार देर रात खत्म हुई कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में नई शिक्षा नीति और चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को पास कर दिया गया। सदस्यों की और से आपति भी जतायी गयी।
इसके बाद भी ईसी में इस पर मोहर लगा दी गयी। ईसी सदस्य और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार आपति के बाद भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन को पास कर दिया गया।
चार वर्षीय स्नातक प्रोग्राम के गुण बिलकुल भी स्पष्ठ नहीं है। यदि पहले से ही छात्र तीन वर्ष के प्रोग्राम में सब कुछ पढ़ रहे हैं तो चार वर्ष का भार छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है।
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डीयू ईसी की बैठक में 12 कॉलेज के फंड जारी नहीं होने का मुद्दा गरमाया
दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद की बैठक में मंगलवार को दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों का फंड जारी नहीं किए जाने का मुद्दा गरमाया। परिषद के सदस्यों ने कॉलेजों को जल्द से जल्द फंड जारी करने की मांग की।
सदस्यों की ओर से कहा गया कि सभी सदस्यों को इस मामले में उपराज्यपाल से बात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करनी चाहिए। दरअसल इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार फंड जारी करती है। फंड जारी नहीं होने से शिक्षक और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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इसके बाद भी ईसी में इस पर मोहर लगा दी गयी। ईसी सदस्य और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार आपति के बाद भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन को पास कर दिया गया।
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चार वर्षीय स्नातक प्रोग्राम के गुण बिलकुल भी स्पष्ठ नहीं है। यदि पहले से ही छात्र तीन वर्ष के प्रोग्राम में सब कुछ पढ़ रहे हैं तो चार वर्ष का भार छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है।
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डीयू ईसी की बैठक में 12 कॉलेज के फंड जारी नहीं होने का मुद्दा गरमाया
दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद की बैठक में मंगलवार को दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों का फंड जारी नहीं किए जाने का मुद्दा गरमाया। परिषद के सदस्यों ने कॉलेजों को जल्द से जल्द फंड जारी करने की मांग की।
सदस्यों की ओर से कहा गया कि सभी सदस्यों को इस मामले में उपराज्यपाल से बात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करनी चाहिए। दरअसल इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार फंड जारी करती है। फंड जारी नहीं होने से शिक्षक और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं मिल पा रहा है। उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
शून्य काल में इसके अलावा तदर्थ शिक्षकों के समायोजन और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 5 दिसंबर को जारी पत्र पर सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग की। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने और चार साल के स्नातक प्रोग्राम, और दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के दिल्ली सरकार के आंबेडकर विश्वविद्यालय में विलय पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी। चार साल का स्नातक कोर्स का कार्यकारी परिषद से पास होना तय है।
डूटा ने एनईपी लागू करने का विरोध किया
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया। हैशटैग रिजेक्ट एनईपी का प्रयोग करते हुए शिक्षकों और छात्रों ने ट्विटर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई। दरअसल मंगलवार को कार्यकारी परिषद की बैठक के एजेंडे में एनईपी को लागू करना शामिल रहा।
डूटा अध्यक्ष राजीव राय के अनुसार इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालयों का दखल बढ़ जाएगा और वर्तमान में चल रहे शैक्षणिक संस्थान कमजोर होंगे।
डूटा ने एनईपी लागू करने का विरोध किया
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया। हैशटैग रिजेक्ट एनईपी का प्रयोग करते हुए शिक्षकों और छात्रों ने ट्विटर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई। दरअसल मंगलवार को कार्यकारी परिषद की बैठक के एजेंडे में एनईपी को लागू करना शामिल रहा।
डूटा अध्यक्ष राजीव राय के अनुसार इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालयों का दखल बढ़ जाएगा और वर्तमान में चल रहे शैक्षणिक संस्थान कमजोर होंगे।