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साइबर ठगों के नेटवर्क का भांडाफोड़: देश भर में 4000 से ज्यादा लोगों से अरबों की ठगी, 1000 केस हुए लिंक

Wed, 24 Nov 2021 11:20 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 24 Nov 2021 11:20 PM IST
सार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और बेंगलुरू से 12 लोगों को दबोचा है, इनके पास से 26 मोबाइल, एक लैपटॉप, 156 सिमकार्ड, 111 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। 111 बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। देश भर में 4000 से ज्यादा लोगों से अरबों की ठगी का अंदेशा जताया जा रहा है।

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Network of cyber thugs busted more than 4000 people cheated billions across the country, 1000 cases linked
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अरबों रुपये की साइबर ठगी करने वाले बदमाशों के गैंग का दिल्ली पुलिस ने भांडाफोड़ किया है। इसका नेटवर्क पूरे देश में फैला है। हर राज्य में यह अलग-अलग माड्यूल पर काम करते हैं। शुरुआती स्तर पर ही इस गैंग से एक हजार से ज्यादा मामले जुड़ गए हैं। अंदेशा इसके 4,000 से भी ऊपर पहुंचने का है। 
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साइबर सेल ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और बंगलुरू से 12 लोगों को गिरफ्तार कर 111 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। आरोपियों के पास से 26 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 156 सिमकार्ड और 111 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
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साइबर सेल के पुलिस उपायुक्त केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि पिछले दिनों उनके पास दिल्ली निवासी बी. पॉल नामक शख्स ने साइबर ठगी की शिकायत दी थी। पीड़ित ने बताया कि उनका खाता केनरा बैंक में है। कुछ चेक से संबंधित जानकारी के लिए उन्होंने गूगल की मदद ली। गूगल से उन्होंने केनरा बैंक का कस्टमर केयर नंबर लेने का प्रयास किया। इस दौरान उनको एक नंबर मिला। 
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नंबर पर बात करने वाले शख्स ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को एक लिंक भेजा। लिंक केनरा बैंक की वेबसाइट से मिलता-जुलता था। आरोपियों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लिंक डाउनलोड करते ही उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद पीड़ित के खाते से 27.10 लाख रुपये निकल लिये गए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने 8 जुलाई को मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि बी. पॉल के खाते से आठ अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर हुए थे। पुलिस ने बैंक  डिटेल के आधार पर आरोपियों की पहचान के प्रयास किए।
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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगों का गैंग लगभग पूरे देश में ही सक्रिय है। पुलिस ने सितंबर में छापेमारी करते हुए पहले छह आरोपी मो. मुजाहिद अंसारी, आफिस अंसारी, गुलाब अंसारी, शाहनवाज अंसारी, बहारुद्दीन अंसारी और बसरुद्दीन अंसारी को बेंगलुरू से गिरफ्तार कर लिया गया। 

यह सभी आरोपी टेलीकॉलर का काम करते थे। गूगल की मदद से कॉल करने वाले लोगों की कॉल इनके पास जाते थे। इसके बाद यह लिंक ट्रांसफर करवाकर आगे ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। इनसे पूछताछ के बाद पता चला कि इनका मास्टर माइंड मुस्लिम अंसारी जामतारा, झारखंड में मौजूद है। गैंग पश्चिम बंगाल, बेंगलुरू और झारखंड से ऑपरेट हो रहा है।

पश्चिम बंगाल और झारखंड में हुई छापेमारी
जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने मंगलवार को एक साथ बंगाल व जामतारा में छापेमारी की। पुलिस ने पहले बंगाल से सहानी खान, अबुबकर साहा, राजेश घोराई, सूरज साहा और मिजानूर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद गैंग के सरगना मुस्लिम अंसारी को जामतारा से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हजारों ठगी की वारदातों की बात कबूल की। इनके पास फिलहाल 111 बैंक अकाउंट और एटीएम मिले। पुलिस ने उनको फ्रीज करा दिया। इनमें करोड़ों की लेनदेन का पता चला। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ कर रही है।

सभी मॉड्यूल के अलग-अलग काम...
बेंगलुरू मॉड्यूल: बेंगलुरू मॉड्यूल का काम अलग-अलग बैंक से मिलते-जुलते लिंक व वेबसाइट बनाना है। इसके अलावा ठगी की प्लानिंग, तैयारी और वेबसाइट पर होने वाले सभी काम बेंगलुरू मॉड्यूल के जिम्मे थे। यह मॉड्यूल गूगल से मदद मांगने वाले लोगों को सबसे पहले लिंक उपलब्ध करवाने केर लए सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का सहारा लिया जाता था। इसके अलावा फर्जी कॉल सेंटर भी बेंगलुरू मॉड्यूल ही चलाता था।

पश्चिम बंगाल मॉड्यूल: पश्चिम बंगाल मॉड्यूबल साइबर ठगों के अलावा देश भर के बाकी गैंग को सिमकार्ड और बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाते हैं। फर्जी पतों और कागजात के आधार पर सिमकार्ड एक्टीवेट कराने के अलावा बैंक खाते खोले गए हैं। इस गैंग का काम ठगी की रकम को निकाल कर मास्टर माइड तक पहुंचाने का काम है। सभी रकम के अनुसार कमीशन के आधार पर काम करते हैं। पुलिस गैंग के बाकी लोगों से पूछताछ कर रही है।

ऐसे दिया जाता था ठगी की वारदात को अंजाम
पीड़ित गूगल की मदद से किसी भी बैंक का कस्टमर केयर नंबर लेने का प्रयास करते थे, लेकिन आरोपियों की चालाकी की वजह से उनका नंबर पीड़ित के पास पहुंच जाता था। इसके बाद आरोपी बैंक का प्रतिनिधि बनकर बात करते थे। बाद में आरोपी एक लिंक डाउनलोड करवाकर पीड़ित का मोबाइल या सिस्टम को हैक कर लिया करते थे। इसके बाद उनको पीड़ित के बैंक खाते की पूरी जानकारी होती थी। यहां तक कोई ओटीपी आता था तो आरोपियों को पता चलता था। इसकी मदद से पूरा खाता खाली कर लिया जाता था।
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