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Delhi News: कड़कड़डूमा कोर्ट में दूसरे दिन भी वकीलों का प्रदर्शन

Wed, 28 Oct 2026 08:17 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 08:17 PM IST
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Lawyers' protest continues for the second day at Karkardooma Court
कामकाज से विरत रहने के कारण कई मामलों की सुनवाई प्रभावित, फरियादी परेशान
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। शाहदरा थाने में वकीलों के साथ कथित मारपीट और पुलिस अधिकारियों के दुर्व्यवहार के आरोप को लेकर लगातार दूसरे दिन बुधवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में वकीलों ने प्रदर्शन किया। वकीलों के प्रदर्शन और कामकाज से विरत रहने के कारण कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई। विरोध प्रदर्शन के चलते कई लोगों को इंतजार करना पड़ा। कुछ लोग बिना काम कराए ही वापस लौट गए।

शाहदरा बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने बुधवार को भी कामकाज का बहिष्कार किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संबंधित एसीपी पर कार्रवाई की मांग की। वकीलों का आरोप है कि शाहदरा थाने में उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। शाहदरा बार एसोसिएशन के सचिव नरवीर डबास ने बताया कि वकीलों की मांग है कि उनके साथ हुई कथित घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए। वहीं, वकील पुनीत चौधरी ने बताया कि हम विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि अपने सम्मान और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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हर तारीख पर खर्च होता है समय और पैसा
अदालत पहुंचे फरियादियों का कहना है कि मुकदमों की सुनवाई के लिए उन्हें कामकाज छोड़कर आना पड़ता है। आने-जाने में किराया खर्च होता है और पूरा दिन भी लग जाता है। ऐसे में सुनवाई नहीं होने पर उन्हें दोबारा तारीख का इंतजार करना पड़ता है। कई लोग अपने मामलों की स्थिति जानने के लिए अदालत पहुंचे थे, लेकिन वकीलों के काम से दूर रहने के कारण उन्हें परेशानी हुई। जमानत याचिकाओं, गवाही और जिरह से जुड़े मामलों में भी कार्यवाही प्रभावित हुई।
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वकीलों को धमकाने का आरोप
दरअसल, विवाद की शुरुआत अधिवक्ता ललित बंसल पर कथित हमले से हुई थी। इस घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी और शाहदरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 23 अक्तूबर की शाम कई वकील आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचे थे। उस समय एसीपी और एसएचओ ने कथित तौर पर आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था। हालांकि, अगले दिन वकीलों को पता चला कि आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर छोड़ दिया गया। समिति ने आरोप लगाया कि इसके बाद मामले में जवाब मांगने थाने पहुंचे वकीलों के सामने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया।

पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला 26 अक्तूबर को गांधी नगर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत के अनुसार, 24 अक्तूबर को एसीपी को सूचना मिली थी कि हेड कांस्टेबल अमित मलिक को कड़कड़डूमा अदालत परिसर में वकीलों के एक समूह ने रोक लिया है। शिकायत में दावा किया गया है कि वकीलों ने 21 अक्तूबर को दर्ज एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार न करने के आरोप को लेकर उनसे पूछताछ की और इस बहस के दौरान कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया।


पुलिस का दावा-सीसीटीवी में कैद हुई घटना
बाद में हेड कांस्टेबल को जाने दिया गया। शिकायत के अनुसार, 24 अक्तूबर को ही उसी दिन दोपहर करीब 2:30 बजे अधिवक्ता अमूल्य, शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों सहित लगभग 15 से 20 वकीलों के साथ थाने पहुंचे और एसएचओ के कमरे में दाखिल हो गए। उन्होंने एसीपी और एसएचओ के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। दावा है कि एक वकील ने कथित तौर पर थाना प्रभारी (एसएचओ) का हाथ खींचने की कोशिश की थी। घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई।
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