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दिल्ली सरकार को 31 मार्च से पहले बकाया राशि के भुगतान का निर्देश
Thu, 25 Mar 2021 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 25 Mar 2021 06:09 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को तीनों नगर निगमों को 31 मार्च से पहले अपने संशोधित अनुमान के अनुसार बकाया राशि जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस राशि का सर्वप्रथम प्रयोग कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान करने में किया जाए।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अपने संशोधित अनुमान के अनुसार निगमों-पूर्व, उत्तर और दक्षिण को बुनियादी कर असाइनमेंट (बीटीए) का भुगतान नहीं करने का कोई औचित्य नहीं है।
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खंडपीठ ने ईडीएमसी के आवेदन को स्वीकार करते हुए दिल्ली सरकार को इस वित्त वर्ष में ही अपने संशोधित अनुमान के अनुसार निगमों को शेष राशि जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 अप्रैल तय करते हुए आदेश पर तामिल कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत एमसीडी कर्मचारियों को वेतन व पेंशन न मिलने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिल्ली सरकार के संशोधित अनुमान के अनुसार, राज्य द्वारा ईडीएमसी, एसडीएमसी और एनआरडीएमसी को बीडीए की ओर राशि का भुगतान वित्तीय वर्ष 2020-21 में क्रमश: 864.8 करोड़ रुपये, 405.2 करोड़ रुपये और 764.8 करोड़ रुपये करना है।
ईडीएमसी की और से पेश अधिवक्ता मनु चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि साल के दौरान निगम को 501 करोड़ रुपये मिले हैं और 363 करोड़ रुपये की राशि दिल्ली सरकार पर बकाया है।
मौजूदा वित्त वर्ष के अंत में केवल कुछ दिन बचे हैं, अगर दिल्ली सरकार द्वारा ईडीएमसी को राशि हस्तांतरित नहीं की तो यह राशि समाप्त होने की संभावना है।दिल्ली सरकार के अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि सरकार के लिए भी राजस्व सृजन के लिहाज से यह मुश्किल साल रहा है।
खंडपीठ ने उनके तर्क पर कहा कि दिल्ली सरकार अगले वित्त वर्ष तक संशोधित अनुमान के अनुसार बीटीए के भुगतान को स्थगित करने की मांग नहीं कर सकती, क्योंकि निगमों को वेतन का भुगतान करने और अन्य वित्तीय दायित्वों का निर्वहन करने के लिए अब भुगतान करना होगा। अदालत ने पाया कि एमसीडी को मिलने वाली राशि में से अधिकांश खर्च कर्मचारियों के वेतन व पेंशन पर खर्च हो जाता है।