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हाड़ कंपा देने वाली ठंड: रैन बसेरों में जगह नहीं होने के कारण सैकड़ों लोग फुटपाथ पर सोने को मजबूर

Sun, 16 Jan 2022 11:03 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 16 Jan 2022 11:03 PM IST
सार

समस्तीपुर बिहार से आकर यहां मजदूरी करने वाले अहमद अली ने बताया कि इतनी बिकराल ठंड है कि उन्हें फुटपाथ पर सोने में डर लगता है, रात में खतरनाक ठंडी हवाएं चलती हैं, इसलिए वह कश्मीरी गेट आईएसबीटी फ्लाईओवर के नीचे सोते हैं, लेकिन यहां उन्हें शौचालय जाने की समस्या होती है। 

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hundreds of people forced to sleep on footpaths due to lack of space in night shelters in delhi
रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इन दिनों हाड़ कंपा देने वाली ठंडक में सैकड़ों लोग फुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं। रैन बसेरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होने के चलते उन्हें वहां पर सोने की जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे लोग खुले आसमान के नीचे, फुटपाथ पर, सड़क किनारे बस शेल्टर के नीचे और फ्लाईओवरों के नीचे सोने के लिए मजबूर हैं। 

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उड़ीसा से आकर यहां रिक्शा चलाने वाले मुकेश साहू चांदनी चौक में फतेहपुरी रोड के किनारे सोते हैं। उन्होंने बताया कि पास के रैन बसेरे में जगह नहीं मिली इसलिए वह बाहर सो रहे हैं। वह रैन बसेरे में सोने के लिए गए थे, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के कारण वहां सोने की जगह ही नहीं थी। 
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समस्तीपुर बिहार से आकर यहां मजदूरी करने वाले अहमद अली ने बताया कि इतनी बिकराल ठंड है कि उन्हें फुटपाथ पर सोने में डर लगता है, रात में खतरनाक ठंडी हवाएं चलती हैं, इसलिए वह कश्मीरी गेट आईएसबीटी फ्लाईओवर के नीचे सोते हैं, लेकिन यहां उन्हें शौचालय जाने की समस्या होती है। 
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साल 2014 में सरकार ने सर्वे किया था कि करीब 16000 लोगों को वह रैन बसेरा उपलब्ध करा रही है। कई एनजीओ भी लाखों लोगों को रैन बसेरा उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के मुताबिक इस समय उनके द्वारा 209 अस्थाई और 216 अस्थाई रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं, जिनमें करीब 21000 लोगों के सोने की व्यवस्था है। लेकिन कोविड-19 का प्रसार बढ़ने के कारण इन रैन बसेरों में अब करीब 10500 लोगों के रहने की व्यवस्था है। यहां लोगों को रहने के साथ-साथ खाने की सुविधा भी दी जा रही है। 

डूसिब के अधिकारियों के मुताबिक रैन बसेरों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। कोरोना महामारी के दौरान 2020 से रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को खाना दिया जा रहा है। उनके पास एक समर्पित टीम है, जो कि शहर के विभिन्न हिस्सों से बेघर लोगों को सड़कों से उठाकर रैन बसेरों में लेकर आती है। 


सुनील कुमार अलेदिया ने बताया कि हजारों लोग ऐसे हैं जिन्हें जबरदस्ती सड़कों से उठाकर रैन बसेरों में रात बिताने के लिए ले आया जाता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब एक लाख बेघर लोग हैं, जिन्हें दिल्ली सरकार मदद करने की लगातार कोशिश कर रही है।

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